Showing posts with label नशन. Show all posts
Showing posts with label नशन. Show all posts

Thursday, 3 May 2018

जिस जनरल थिमैया का नाम लेकर PM मोदी ने पंडित नेहरू पर साधा निशाना, पढ़े उनकी Story

[ad_1]

पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के कलबुर्गी में तीन मई को अपनी चुनावी रैली में कांग्रेस पर हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि यह धरती वीरों की भूमि है लेकिन कांग्रेस सेना के बहादुर जवानों के त्‍याग का सम्‍मान नहीं करती. जब हमारे जवानों ने सर्जिकल स्‍ट्राइक किया तो कांग्रेस ने उस पर सवाल उठाए. वे मुझसे सर्जिकल स्‍ट्राइक का सबूत मांगते रहे. सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद कांग्रेस के एक वरिष्‍ठ नेता ने हमारे मौजूदा आर्मी चीफ को 'गुंडा' कहा. इतिहास गवाह है कि इस धरती के वीर फील्‍ड मार्शल करियप्‍पा और जनरल थिमैया के साथ कांग्रेस सरकार ने कैसा बर्ताव किया? जनरल थिमैया को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन ने अपमानित किया. इस संदर्भ में इतिहास के पन्‍नों को उलटकर जनरल थिमैया की कहानी पर आइए डालते हैं एक नजर:


जनरल कोडनडेरा सुब्‍बैया थिमैया
1906 में कर्नाटक में जन्‍मे थिमैया उसी कोडनडेरा समुदाय से ताल्‍लुक रखते थे जिससे देश के पहले कमांडर-इन-चीफ जनरल करियप्‍पा संबंधित थे. जनरल केएस थिमैया 1957-61 तक आर्मी चीफ रहे. द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान इंफ्रेंट्री ब्रिगेड संभालने वाले एकमात्र भारतीय सैन्‍य अधिकारी थे. 1962 में भारत-चीन युद्ध के 15 महीने पहले वह रिटायर हुए. उसके बाद वह साइप्रस में संयुक्‍त राष्‍ट्र शांति रक्षक दल के कमांडर नियुक्‍त हुए. इसी ड्यूटी के दौरान 18 दिसंबर, 1965 को उनका निधन हो गया.


narendra modi
पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के कलबुर्गी में चुनावी रैली के दौरान कहा कि सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद कांग्रेस के एक वरिष्‍ठ नेता ने हमारे मौजूदा आर्मी चीफ को 'गुंडा' कहा.


विवाद
शिव कुमार वर्मा की किताब 1962 द वार दैट वाज नाट (1962 The War That Wasn't) में जनरल थिमैया के 1959 में इस्‍तीफा देने की घटना का विस्‍तार से जिक्र किया गया है. उसमें बताया गया है कि चीन के मोर्चे पर भारत की नीतियों से शीर्ष स्‍तर पर मतांतर था. उसी कड़ी में रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन और थिमैया की मीटिंग हुई. वहां पर मेनन ने जनरल से कहा कि वह अपनी बात प्रधानमंत्री से सीधे कहने के बजाय पहले उनसे साझा कर मामले को इसी स्‍तर पर सुलझाएं. इसके साथ ही यह कहते हुए मेनन ने मीटिंग खत्‍म कर दी कि यदि मसले सार्वजनिक हुए तो उसके राजनीतिक प्रभाव की कीमत चुकानी होगी. इसके तत्‍काल बाद थिमैया ने इस्‍तीफा दे दिया.


प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने तत्‍काल उनको अपने पास बुलाया और लंबी बातचीत के बाद देश हित में आसन्‍न चीनी खतरे को देखते हुए इस्‍तीफा वापस लेने का आग्रह किया. नतीजतन जनरल थिमैया ने इस्‍तीफा वापस ले लिया. किताब के मुताबिक थिमैया के जाने के बाद उनके इस्‍तीफे की खबर को जानबूझकर मीडिया के समक्ष लीक कर दिया गया, जबकि इस्‍तीफे में लिखी बातों को छुपा लिया गया. उसका नतीजा यह हुआ कि अगले दिन सभी अखबारों की सुर्खियां जनरल थिमैया के इस्‍तीफ से पटी हुई थीं.


उसके दो दिन बाद दो सितंबर, 1959 को पंडित नेहरू ने संसद में इस मसले पर बयान देते हुए कहा कि उनके आग्रह को मानते हुए आर्मी चीफ ने इस्‍तीफा वापस ले लिया है. उन्‍होंने मिलिट्री पर सिविलयन अथॉरिटी की सर्वोच्‍चता बताते हुए कहा कि दरअसल अलग मिजाज के व्‍यक्तित्‍वों के कारण ऐसी परिस्थिति उत्‍पन्‍न हुई. इसके साथ ही उन्‍होंने जनरल थिमैया की आलोचना करते हुए कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा संकट के बीच वह पद छोड़ना चाहते हैं. जनरल थिमैया के त्‍यागपत्र के मजमून को आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.




[ad_2]

Source link

Wednesday, 2 May 2018

भारत ने चीन पर साधा निशाना, कहा- सुरक्षा परिषद में गुप्त वीटो से काम पर पड़ रहा है असर

[ad_1]

संयुक्त राष्ट्र: भारत ने पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में शामिल करने की उसकी कोशिशों में लगातार रोड़ा अटकाने के लिए चीन पर निशाना साधा और प्रतिबंध समितियों जैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सहायक अंगों में ‘‘गुप्त वीटो’’ के इस्तेमाल की आलोचना की. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि वह अध्यक्ष के इस सुझाव का स्वागत करते हैं कि इस बात का पता लगाया जाए कि कैसे वीटो परिषद के काम और उसकी प्रभावकारिता पर असर डालता है.


उन्होंने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में वृद्धि और समान प्रतिनिधित्व के सवाल पर अंतर सरकारी वार्ता के अनौपचारिक पूर्ण सत्र की बैठक में यह बात कही. अकबरुद्दीन ने कहा कि जिन मौकों पर गुप्त वीटो का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये, वहां उसका इस्तेमाल किये जाने से परिषद के काम और उसकी प्रभावशीलता पर असर पड़ रहा है. अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में हम परिषद के सहायक अंगों में ‘गुप्त’ वीटो के इस्तेमाल पर प्रकाश डालना चाहेंगे. मुझे यह स्पष्ट करने दीजिए कि गुप्त वीटो क्या है. ’’ उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के एक दर्जन से अधिक सहायक अंग हैं जो हर साल अनेक फैसले सुनाते हैं.


प्रतिबंध समितियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा उनमें से प्रत्येक वीटो का इस्तेमाल करते हैं लेकिन ‘हममें से किसी को भी इस बारे में जानकारी नहीं दी जाती है.’’ उन्होंने कहा कि ‘गुप्त’ वीटो का इस्तेमाल करने वाले परिषद के स्थायी सदस्यों को उनके कार्यों के लिए सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की जरुरत नहीं होती है.


उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के वीटो को न तो दर्ज किया जाता है और न ही सार्वजनिक किया जाता है. वास्तव में, गुप्त वीटो के इस्तेमाल से जो प्रस्ताव खारिज हो जाता है, उसे कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता है, क्योंकि उसे ‘अवरूद्ध’ माना जाता है.’’ बहरहाल, अकबरुद्दीन ने किसी भी देश का नाम नहीं लिया लेकिन यह अच्छी तरह पता है कि जब भी पाकिस्तानी आतंकवादियों या आतंकवादी समूहों की बात आयी तो चीन ने अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल किया.


उन्होंने कहा कि इस तरह के वीटो के इस्तेमाल को सार्वजनिक किया जाना और इसके इस्तेमाल के लिये स्पष्टीकरण दिये जाने को जरूरी बनाना सुरक्षा परिषद के कामकाज में पारदर्शिता और उसे प्रभावी बनाने की दिशा में पहला कदम होना चाहिये. उन्होंने कहा कि वीटो सेक्शन में गुप्त वीटो के इस्तेमाल समेत अन्य सुझावों पर विचार किया जा सकता है.


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार प्राप्त स्थायी सदस्य चीन मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रयासों में बार-बार रोड़ा अटकाता आ रहा है. 


इनपुट भाषा से भी 


 




[ad_2]

Source link

"Release Them": Relatives Of Gaza Hostages Break Into Israeli Parliament Panel

A group of relatives of Israelis held hostage by Palestinian gunmen in Gaza rushed into a parliamentary committee session in Jerusalem on Mo...