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Saturday, 5 May 2018

Exclusive: BJP कर्नाटक प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर बोले- कांग्रेस जा रही है और बीजेपी आ रही है

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रविंद्र कुमार, बंगलुरू: कर्नाटक विधानसभा चुनाव का समर अपने चरम पर है. राजनीतिक दलों के चर्चित चेहरे एक दिन में कई-कई रैलियों में शिरकत करते नजर आ रहे हैं. कर्नाटक के चुनावी खुमार के बीच ही बेंगलुरू में जी मीडिया ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री और बीजेपी कर्नाटक प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर के साथ खास बातचीत की. बातचीत के दौरान जावड़ेकर ने एक बार फिर दावा किया कि कर्नाटक से कांग्रेस जा रही है और बीजेपी आ रही है. इसके साथ ही उन्होंने कई अन्य मुद्दों पर भी जी मीडिया से बातचीत की. पढ़ें इंटरव्यू में पूछे गए सवाल और उनके जवाब...


सवाल- क्या कांग्रेस मुक्त हो पाएगा कर्नाटक?
जावड़ेकर- बिलकुल, कर्नाटक से कांग्रेस जा रही है बीजेपी आ रही है. हम पूर्ण बहुमत और अप्रत्याशित जीत की तरफ जा रहे हैं. हमें कोई आशंका नहीं है. मोदी जी के आने के बाद कांग्रेस ने हर चुनाव में अपना राज्य खोया है. कर्नाटक के आसपास ही पहले तेलंगाना, फिर आंध्रा, फिर केरल खोया, महाराष्ट्र खोया. चारों आसपास के राज्य खोए, अब कर्नाटक भी जा रहा है. इसी तरह नॉर्थ ईस्ट में भी अपने राज्य खोए. जम्मू कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल और उतराखंड, झारखंड जहां भी कांग्रेस सत्ता में थी, हारी है. 
कांग्रेस मुक्त भारत का मतलब मोदी जी ने अच्छा समझाया. हम कांग्रेस का जो corruption का कल्चर है उससे मुक्त करना चाहते हैं. कांग्रेस ने राजनीति में जो गंदगी फैलाई, उससे मुक्त करना चाहते हैं. कुशासन से मुक्त करना चाहते हैं. ये एक तरह से कल्चर की लड़ाई है. भारत की जो तरक्की नहीं हुई, हम उसके लिए लड़ रहे हैं. 


सवाल- राहुल गांधी कह रहे हैं कर्नाटक से भाजपा का हार का सिलसिला शुरू होगा और ये राजस्थान एमपी होते हुए 2019 तक जाएगा. यानी कहीं न कही उनकी भी तैयारी है कर्नाटक के द्वारा 2019 जीतने की? 
जावड़ेकर- ये तैयारी है या दिन में देखा हुआ सपना है, ये 15 तारीख को पता चल जाएगा. सच्चाई ये है कि लोकतंत्र में दिन में सपने देखने की मनाही नहीं है.


सवाल- आपने करप्शन की बात की, corruption मुक्त भारत बनाने की बात कही, कांग्रेस इसकी जननी है ऐसा आप कह रहे हैं लेकिन येदियुरप्पा जो आपके CM उम्मीदवार हैं. 2012-13 में उनको इसी आधार पर निकाला गया था भाजपा से. क्या आपकी नजर में आज वो पाक साफ हो गए?
जावड़ेकर- क्योंकि कोर्ट ने उनको बरी किया और आज उन पर कोई आरोप नहीं है, सभी आरोप गलत साबित हुआ. वो अपनी अलग पार्टी बनाए, 13 में तो हम सत्ता में बने रहते, अगर पार्टी तीन फाड़ में न होती. क्योंकि हमने सुशासन दिया था अच्छा काम किया था. इस बार सब एकजुट है, एक पार्टी है और यहां पूरा माहौल बन गया है. और येदियुरप्पा जी के प्रति लोग "रेत बंदू आपते मित्र" कहते हैं. किसानों ओर देहात में एक अच्छे प्रशासक और न्याय करने वाले राजा के रूप में उनको देखते हैं. 


सवाल- लोगों में ये भी पहचान है कि लिंगायत को लेकर अलग धर्म का जो मसला उठा था, अभी की सरकार ने आपको भेजा है, 2013 में सिग्नेचर करने वालो में येदियुरप्पा भी थे, जिसका विरोध अब आप भी कर रहे हैं, येदियुरप्पा भी कर रहे हैं. क्या ये मुद्दा आपके लिए परेशानी का सबब बन रहा है कर्नाटक में?
जावड़ेकर- बिलकुल नहीं, ये दांव कांग्रेस पर उलट गया है. क्योंकि कांग्रेस की रणनीति हमेशा समाज को बांटने की रही है. मणिपुर चुनाव में भी मैं इंचार्ज था, तब भी कांग्रेस की नीति नागा कूकी मैंती, तीनों में लड़ाई करते रहो, रोड ब्लॉक करते रहो, बंद होता रहे, और लोग आपस में झगड़ते रहे ताकि कांग्रेस सत्ता में बनी रहे लेकिन अब हमारी सरकार आई तो सारी मिलिटेंसी खत्म होने लगी. पूरा लॉकआउट बंद हो गया. और सभी तीनों जाति एकसाथ काम कर रही हैं. यहां भी लिंगायत के मुद्दे पर कांग्रेस ने एकसमाज बांटने की कोशिश की, उसके लिए समाज में ही बहुत रिएक्शन है और कांग्रेस का ये दांव उलट गया है. कांग्रेस के बड़े-बड़े लिंगायत नेता आप किसी को भी पूछो लोग गलत मुहीम ही बताएंगे. कांग्रेस फिर साढ़े चार साल चुप क्यों रही, ये सिर्फ येदियुरप्पा को सीएम बनाने से रोकने की कवायद थी, जो उन्हें उलटी पड़ गई.


सवाल- येदियुरप्पा को रोकने का दांव था, कर्नाटक में ये भी प्रचलित है की बीजेपी के कई बड़े नेता चाहते है कि 90 से ज्यादा नहीं आए, इनको क्लब 90 कहा जा रहा है?
जावड़ेकर- ऐसा है ये मीडिया की क्या परिभाषा है मुझे समझ नहीं आती. क्योंकि लोक सभा के पहले लोग कहते थे के बीजेपी में एक ऐसा क्लब है जो कहती है बीजेपी 200 से ज्यादा नहीं आएगी, लेकिन 282 आए. यहां ऐसा कोई क्लब नहीं है, 90 की कोई बात नहीं कर रहा है. हमारा पूर्ण बहुमत होगा. हंग असेंबली नहीं होगी और बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाएगी.


सवाल- या फिर JDS के साथ? क्योंकि PM मोदी, देवगौड़ा की बड़ाई कर रहे हैं? कुमार स्वामी पर कोई अटैक नहीं किया जा रहा है तो क्या हंग असेंबली की स्थिति में आप जेडीएस का सपोर्ट लेंगे या उन्हें समर्थन देंगे?
जावड़ेकर- नहीं, जेडीएस के खिलाफ तो हम लड़ रहे हैं. पीएम ने देवगौड़ा के लिए जो कहा, वो सभ्यता और शिष्टाचार का मसला है कि जिसमें पीएम पूर्व पीएम की इज्जत करते हैं. आज भी देवगौड़ा जी खुद लोगों का काम लेकर आते हैं अपना यही अनुभव मोदी जी ने बताया. क्योंकि राहुल गांधी ने बहुत ही विचित्र तरीके से देवगौड़ा जी की बात कही थी. हंग असेंबली नहीं बनेगी. पूर्ण बहुमत मिलेगा. BJP सत्ता में आएगी. इसलिए इस बार हमने मैनिफेस्टो की जगह वचन कहा है. नम कर्नाटक नमः वचना.


सवाल- इसी वचन में महिलाओं के लिए विशेष ध्यान दिया गया है मंगलसूत्र, स्मार्टफोन? मंगलसूत्र से मंगल होगा BJP का?
जावड़ेकर- ये BJP का मंगल होने का मुद्दा नहीं है. महिलाओं के सशक्तिकरण का एक सतत लगातार प्रयास मोदी सरकार कर रही है. अगर कुपोषण जैसी समस्या से हम जूझ रहे हैं तो ऐसे में गर्भवती रहते हुए ही महिला को अच्छा खाना मिले तो नवजात शिशु को भी अच्छा खाना मिले. फिर 6 महीने की उसको परवरिश के लिए छुट्टी मिले. उसकी सभी दवाए इंद्रधनुष पैकेज में सारे टीकाकरण हों. ये हमारा मूल प्रयास है. इसी में गरीब महिलाओं को भी एक स्मार्टफोन देना उसकी सशक्तिकरण का ही हिस्सा है. वो भी बात करना और जानकारी लेना चाहती है. ताकि उसका अच्छा उपयोग कर सके. और उसके साथ-साथ हमारे यहां सोने का महत्व है. इसलिए गरीब परिवार की शादी में 3 ग्राम सोना ओर 25000 रुपये हम देंगे. किसी को ये गलत लगेगा, मगर गले में मंगलसूत्र सुहाग की निशानी है.


सवाल- टीपू सुल्तान को लेकर कर्नाटक में काफी सियासत हुई. अब यही सियासत पाकिस्तान की तरफ से देखने को मिल रहा है और टीपू सुल्तान को टाइगर ऑफ मैसूर कह कर कहीं न कहीं भड़काने वाली बात कह कर बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है पाकिस्तान द्वारा?
जावड़ेकर- पाकिस्तान क्या कर रहा है उससे मुझे कोई लेना-देना नहीं, लेकिन कांग्रेस जो एक जयंती कर रही और विवेकानंद जयंती नहीं कर रही है, ये लोगों को समझ आ रहा है. हमारा कांग्रेस पर सबसे बड़ा प्रहार यही है कि आप मुसलमान को, गरीब को एक वोट बैंक की नजर से देखते हो. हम इस नजर से नहीं देखते. सबका साथ सबका विकास. हमारी उज्ज्वला योजना में मजहब नहीं देखा जाता. मुस्लिम बहनों को भी गैस मिला है. टीपू सुल्तान कोई मुद्दा नहीं है.


सवाल- पाकिस्तान पर ही, पाकिस्तान के जनक जिन्ना, जिसके प्रति BJP की अपनी ही विचार धारा है. जिन्ना की मजार पर जाने के कारण से आडवाणी जी को भी अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था. जसवंत सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था. आपके शासन में AMU में जिन्ना की तस्वीर और सरकार चुप, आप चुप?
जावड़ेकर- नहीं-नहीं, ये चुप रहने का मसला नहीं है. ये अभी जो आंदोलन का मुद्दा है, वो मुद्दा वहां जो मारपीट हुई कोई बाहर वाला छात्रों को मारपीट किया, इसके कारण वो छात्र धरने पर हैं और उनकी मांग है कि जिन्होंने मारपीट की उनकी गिरफ्तारी हो और पुलिस पर कार्यवाही हो. क्योंकि उन्होंने बचाया नहीं. ये मुद्दा अलग है. वहां कुलपति निश्चित रूप से छात्रों से संवाद कर रहे हैं. इसके दो पक्ष हैं जिसमें मारपीट होने वाले छात्रों का आंदोलन चला.


सवाल- योगी जी बोलते हैं जिन्ना बर्दाश्त नहीं और BJP की भी यही नीति रही है, विचारधारा रही है कि जिन्ना बर्दाश्त नहीं. लेकिन जिन्ना की तस्वीर और जिन्ना पर आपकी क्या राय है?
जावड़ेकर- जिन्ना पर पार्टी की राय सबको पता है. और इसलिए वो फिर से दोबारा बताने की जरूरत नहीं. और अभी जो विवाद वहां पर है उस पर हमारे कुलपति लगातार संवाद करके नजर बनाए हुए हैं.


सवाल- हामिद अंसारी साहब भी इस पर कूद गए हैं?
जावड़ेकर- नहीं इसकी मुझे जानकारी नहीं है.


सवाल- जिन्ना की तस्वीर अभी हटनी चाहिए?
जावड़ेकर- मैं अभी कर्नाटक में व्यस्त हूं.


सवाल- आखिरी सवाल, क्योंकि येद्दयुरप्पा जी ने डेट तय कर दी है 17  या 18 को सीएम पद की शपथ लेंगे. लेकिन, कांग्रेस भी यही कह रही है?
जावड़ेकर- मैंने कहा है कि दिन में सपना देखने का अधिकार कांग्रेस को है. लेकिन, हम जो कह रहे हैं वो grounds well support है. आप बंगलुरू या बाहर में किसी भी किसान या लोगों से महिलाओं से बात करिए. बंगलुरू की अभी कैसी व्यवस्था है, गार्डन सिटी को गार्बेज सिटी बनाया. बंगलुरू के तालाब में पूरा सीवर डाल दिया और तालाब खराब हो गए. सड़क में गड्ढे होने से 190 लोगों की मौत हो चुकी है. corruption के मामले सामने आ रहे हैं. कानून-व्यवस्था ध्वस्त है. गुंडाराज है, 3500 किसानों की आत्महत्या हुई है. यही सब इश्यू हैं जिससे लोग 12 तारीख की वोट कर रहे हैं. ताकि कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा सकें.




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karnataka elections 2018 s m krishna supporters and relatives left bjp joined congress

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक दौरे के दौरान गुरुवार 3 अप्रैल को बेंगलुरू में पूर्व सीएम एस एम कृष्णा के साथ मंच पर नजर आए थे. कर्नाटक चुनाव से पहले पूर्व सीएम और पीएम के साथ दिखने को पार्टी के कर्नाटक में अपनी पकड़ बनाने के लिए उठाए गए मजबूत कदम के रूप में देखा गया. लेकिन बीजेपी के लिए कर्नाटक चुनाव में जीत हासिल करने की राह आसान नहीं होने वाली है. बेंगलुरु से महज 65 किलोमीटर दूर एस एम कृष्णा के ही गृहनगर मद्दुरु में बीजेपी बड़ी मुश्किल का सामना कर रही है. राज्य में खुला सबसे पहला पार्टी ऑफिस अब बंद हो चुका है. ऐसा इसलिए क्योंकि एस एम कृष्णा के समर्थक जो उनके साथ कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे, उन्होंने फिर से कांग्रेस का हाथ थाम लिया है.


नाराज होकर पिछले साल छोड़ी थी कांग्रेस
साल 2017 में एस एम कृष्णा सहित बड़ी संख्या में उनके समर्थकों ने कांग्रेस से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी थी. इन समर्थकों में से कई कृष्णा के रिश्तेदार भी थे. लेकिन एक हफ्ते ये वापस कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व की ओर से उन्हें उपेक्षित किया गया, जिस कारण उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला लिया. इसके साथ ही कर्नाटक में पांव जमाने के इरादे से मद्दुरु में खोला गया पहला बीजेपी ऑफिस और उसकी कमान संभालने वाले वहां के पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मण कुमार को पार्टी ने खो दिया.


टिकट नहीं मिलने से नाराज मद्दुरु अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, लक्ष्मण कुमार जिन्हें बीजेपी ने मद्दुरु का चीफ बनाया था उन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी का साथ छोड़ा. कुमार ने बताया कि, 'बीजेपी का इस इलाके में अस्तित्व भी नहीं था. मैंने मेहनत करके लगभग पूरे संगठन को तैयार किया. मुझसे वादा किया गया था कि मुझे टिकट दिया जाएगा, लेकिन अचानक किसी को और को चुन लिया गया. मैंने अपनी नाराजगी जाहिर की, लेकिन बीजेपी की ओर से कोई इस पर बात करने को तैयार नहीं था. इस वजह से मैं कांग्रेस में आ गया.'


जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मण कुमार की जगह बीजेपी ने सतीश को टिकट दिया है. लेकिन कुमार के जाने से अब इलाके में पार्टी का ऑफिस ही नहीं रह गया है. बीजेपी छोड़ने पर न सिर्फ कार्यालय से पार्टी का बोर्ड बल्कि उस पर लगे झंडे और सीएम उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा आदी के फोटो भी हटा दिए गए. अब इस इमारत पर कांग्रेस का झंडा लगा दिया गया है. इस बीच सतीश ने एक रिहायशी इलाके में अपना ऑफिस बनाया है.


एस एम कृष्णा के भतीजे भी कांग्रेस में हुए शामिल
एस एम कृष्णा के भतीजे गुरुचरण भी बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वालों में से एक हैं. उन्होंने बताया कि 'मेरे समर्थकों और मैंने निष्पक्ष रहने का फैसला किया था. लेकिन एस एम कृष्णा को जहां पीएम मोदी का साथ मिला वहीं गृहनगर में खुद को अकेला पाकर हम कांग्रेस में शामिल हो गए.' गुरुचरण ने आगे कहा कि 'एक साल पहले चाचा एस एम कृष्णा के साथ पार्टी छोड़ने पर हमसे किसी ने भी संपर्क नहीं किया. हम आखिर तक इंतजार करते रहे लेकिन कांग्रेस ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. कुछ दिनों पहले खुद सीएम सिद्धारमैया ने फोन कर कांग्रेस में वापस शामिल होने का अनुरोध किया, जिसे हमने मान लिया. हमें लगता है कि इस तरीके से हम बेहतर तरीके से विपक्षी पार्टी जेडी(एस) का सामना कर पाएंगे और लोगों के लिए भी कुछ अच्छा कर सकेंगे.'


भले ही एस एम कृष्णा के समर्थक व उनके रिश्तेदारों ने फिर से कांग्रेस का हाथ थाम लिया हो, लेकिन वे खुद भाजपा के साथ बने रहेंगे. सूत्रों की मानें तो रैली के दौरान पीएम मोदी के साथ कर्नाटक पूर्व सीएम का मंच पर दिखाई देना इसका साफ इशारा था.


कर्नाटक चुनाव से पहले बीजेपी ने पार्टी को मजबूती देने के लिए एस एम कृष्णा को अपने साथ शामिल किया था. साल 1999 से 2004 तक राज्य के सीएम रहने वाले कृष्णा के जरिए पार्टी अपनी छवि मजबूत करना चाहती थी. लेकिन कुछ रैलियों के अलावा वे बीजेपी के किसी भी अन्य चुनावी प्रचार में कम ही नजर आए हैं.




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Narendra Modi Rallies Karnataka Assebly Election Bjp Congress News And Updates

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बेंगलुरु.नरेंद्र मोदी शनिवार को कर्नाटक के टुमकुर में कहा कि कांग्रेस कई सालों तक गरीब-गरीब चिल्लाती रही। लेकिन जब देश ने एक गरीब परिवार के व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन लिया तो उसने ये कहना बंद कर लिया। मोदी आज कर्नाटक में गड़ाग, शिमोगा और मैंगलुरु में भी सभाएं करेंगे। विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान होगा, 15 को नतीजे आएंगे।

वो तो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं

- मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा, "अब कांग्रेस वालों ने ऊपर से नीचे तक, लोकल हो, देशी हो या विदेशी हो, इधर से हो या उधर से हो, समझ हो या न हो, चना का पेड़ होता है या पौधा होता है, लाल मिर्च होती है या हरी, इसका भी जिनको ज्ञान नहीं है। जो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं। वो अब दिन-रात किसान-किसान बोल रहे हैं।"
- "इंदिरा गांधी के समय से लेकर कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए गरीबों को मूर्ख बना रही है। कांग्रेस एक झूठ बोलने वाली पार्टी है। वे एक बार फिर चुनाव जीतने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। न तो उन्हें किसानों की चिंता है और न ही गरीबों की। लोग अब कांग्रेस से थक चुके हैं।"
- "कर्नाटक के लोगों को कांग्रेस और जेडीएस के अनकहे गठबंधन को समझना चाहिए। वे लड़ते दिख तो रहे हैं लेकिन बेंगलुरु में जेडीएस, कांग्रेस के एक मेयर को समर्थन कर रही है।"

टुमकुरु महान लोगों की भूमि
- मोदी ने कहा, "टुमकुरु महान लोगों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैं यहां आया था और सिद्धगंगा मठ के स्वामी शिवकुमार का आशीर्वाद लिया था।"

- "टुमकुरु के लोगों को हेमावती नदी का पानी क्यों नहीं मिल पा रहा? सिंचाई के क्षेत्र में बीते 30 साल से कोई काम नहीं हुआ। कांग्रेस की रुचि तो केवल कालाधन भरने में है। "



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Friday, 4 May 2018

Pm Modi Is Making Bjp Wave In By Rallies In Karnataka - कर्नाटक चुनाव: मोदी की रैलियों से बीजेपी की लहर बनाने की कोशिश

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कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।

फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।


बीजेपी की कोशिश कांग्रेस के अहिंदा (अल्पसंख्यक, हिंदूइदावरू यानी ओबीसी और दलित) के गढ़ में सेंध लगाने की है। उन्हें उम्मीद है कि उसके दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक का एक हिस्सा जद (स) को जाएगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं पिछड़ी कुरुबा जाति से हैं। प्रधानमंत्री मोदी उसके ओबीसी कार्ड का मजबूत काट हैं।

दक्षिण का मायाजाल

बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि दक्षिण कर्नाटक की फिलहाल जद (स) बनाम कांग्रेस लड़ाई को यदि वे त्रिकोणीय बना सकें तो चुनावी नतीजे अलग ही आएंगे। यहां 10 से 12 सीटें जीतने के लिए बीजेपी को मोदी का ही सहारा है।

लिंगायत कार्ड

पार्टी का मानना है कि कांग्रेस अंतिम अस्त्र के तौर पर बीजेपी की केंद्र सरकार पर लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने वाले राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी न देने का आरोप लगाएगी। लेकिन बीजेपी के भरोसा है कि इससे उन्हें अधिक नुकसान नहीं होगा।
 



कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।


फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।






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ओबीसी बनाम ओबीसी







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BJP President Amit Shah In Bhopal News Updates Mp

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भोपाल.भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को पार्टी के 6 हजार कार्यकर्ताओं को अगले विधानसभा चुनाव के लिए जीत का मंत्र दिया। साथ ही कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। कार्यक्रम में शाह ने कहा कि राहुल मध्य प्रदेश में जीत का सपना कैसे देख सकते हैं, दूरबीन लगाएंगे तो भी उन्हें ये नजर नहीं आएगी। शाह ने खुलकर शिवराज सिंह सरकार के कामकाज की तारीफ की। इससे पहले कुछ शिवसैनिकों ने अमित शाह के दौरे का विरोध करते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए।

राहुल-कमलनाथ के जीत के दावों पर हंसी आती है

- अमित शाह ने कहा, ''मप्र देश का दिल है, यहां भगवान महाकाल स्वयं विराजमान हैं। ऐसी धरती भाजपा के लिए पूज्यनीय है। मप्र में कांग्रेस के नए अध्यक्ष कमलनाथ और राहुल गांधी पूरे विश्वास से बोल रहे हैं कि इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी। मुझे उनके बयानों पर हंसी आती है। जीत तो दूर राहुल गांधी को कांग्रेस का अस्तित्व भी दूरबीन लेकर ढूंढना पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं से कहता हूं कि आप में हमें हराने का दम नहीं।''

कांग्रेस ने चुनाव में राजा-महाराजाओं की टीम उतरी

- शाह ने कहा, ''राहुल गांधी को मैं बताना चाहता हूं कि मप्र भाजपा का गढ़ है। यहां हमारी पैठ अंगद के पैर के जैसी है। भाजपा गरीबों की बात करती है और आप राजा-महाराजा की। अब की बार लड़ाई कॉर्पोरेट और किसानों के बीच है। कांग्रेस राजा-महराजाओं को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है, उनसे डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि हमारा बूथ कार्यकर्ता भी राजा-महाराजा को हराने की ताकत रखता है।''

कांग्रेस ने दुनियाभर में हिंदू संस्कृति को बदनाम किया

- शाह ने भगवा आतंकवाद का जिक्र करते हुए कांग्रेस को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक फर्जी केस के जरिए भगवा आतंकवाद नाम देकर हिंदू संस्कृति को दुनियाभर में बदनाम किया। अब जब कोर्ट ने पूरे मामले को ही नकार दिया है तो कांग्रेस चुप क्यों हैं।

- राहुल गांधी 2014 के लोकसभा चुनाव में देशभर में घूम-घूमकर भगवा आतंकवाद रट रहे थे। अब तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे। हमें ही जन-जन तक उनके इस कारनामे को पहुंचाना होगा।

शाह ने दिया मप्र चुनाव में जीत का मंत्र

- भाजपा अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से कहा कि हमें संगठन में काम करते हुए जन-जन तक पहुंचना होगा। बूथ लेवल पर काम करना होगा। मप्र में भाजपा के एक करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ता हैं। इनमें से 65 लाख कार्यकर्ताओं का हमारे पास पूरा डाटा है। अगर 65 लाख कार्यकर्ता 5 दिन भी चुनाव प्रचार करते हैं तो जीत से कोई नहीं रोक सकता।

- इस बार हम चुनाव में जीत के लिए नहीं जाएं, बल्कि इस अंतर को बढ़ाने की कोशिश करें। जीत का अंतर इतना हो कि विरोधियों की नींद उड़ जाए। अाप संगठन से मिली सीख का स्मरण करो और अर्जुन की तरह दुश्मनों पर टूट पड़ो, जीत अापकी होगी।

कर्नाटक में जीत के लिए पटाखे तैयार रखें

- शाह ने पार्टी की विजयश्री गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस जो बात कह रही है, मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि लोकसभा चुनाव के बाद सबसे पहले महाराष्ट्र में भाजपा ने जीत दर्ज की। इसके बाद हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा, हिमाचल, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा में विजय मिली। अब कार्यकर्ता मई में पटाखे तैयार रखें, कर्नाटक भी हम जीतेंगे।

नरेंद्र मोदी वरदान की तरह हैं: शिवराज

- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री देश ही नहीं दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। मोदी जी देश के लिए ईश्वर का वरदान हैं। गरीबों, विकास के लिए जितनी तड़प मोदी जी में है, शायद किसी नेता में हो।

- बता दें कि अमित शाह के कार्यक्रम में करीब 6 हजार भाजपा नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके लिए पार्टी के 58 जिलाध्यक्ष और 800 से ज्यादा मंडल अध्यक्षों को बुलाया गया था।



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Bjp Facing Self Goal By Own Leaders On Dalit Issue - दलितों को साधने की बीजेपी की रणनीति पर उसी के मंत्री- सांसद लगा रहे पलीता

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दलितों पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से दलित कार्ड राजनीति का प्रमुख एजेंडा रहा है और बात जब चुनाव में मतदाताओं को लुभाने की हो तो यह कार्ड आन-बान की बात हो जाती है। दलित विरोधी छवि से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी दलितों को प्रभावित करने का हर दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेकिन कोई भी दलित कार्ड काम नहीं आ रहा है। चाहें दलितों के घर जाकर खाना खाने का हो या फिर उनके घर सोने का या बात करें उनके साथ उनकी परेशानियों को जानने का,भाजपा मंत्रियों का सारा दांव उल्टा ही पड़ता जा रहा है।

भाजपा के मंत्री, विधायक और सांसद अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

मामला उत्तर प्रदेश का है जहां योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को और बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घर जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है। योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी दलितों के यहां खाने को लेकर एक हास्यास्पद बयान दे डाला है उन्होंने कहा- मच्छर काटने के बावजूद मंत्री दलितों के घर रुक रहे हैं। 
दलितों पर हो रही राजनीति से आहत बीजेपी के दलित सांसद उदित राज ने मंत्रियों की इन हरकतों को शर्मनाक और  ऐसी घटनाओं को दलित समुदाय के लिए अपनामजनक बताया है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के दलितों का मानना है कि यह उन्हें नीचा दिखाता है। उदित राज ने कहा कि मैं बीजेपी के प्रवक्ता के रूप में नहीं बोल रहा हूं बल्कि एक दलित के रूप में बोल रहा हूं। मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं कि एक सवर्ण दलित के घर यह बोलने जाता है कि देखो वे नीच हैं और दूसरे ऊंचे हैं। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी भाजपा के मंत्रियों को दलितों के घर में खाना खाने का दिखावा करने से बचने की सलाह दी है। संघ के प्रचार प्रमुख डॉ मनमोहन वैद्य ने कहा, "पीएम मोदी ने नेक नीयती से दलितों के कल्याण की मुहिम चलाई थी लेकिन पार्टी नेताओं ने उनकी विचार धारा को ही नष्ट कर दिया है।" 

उन्होंने कहा कि 'संघ सदियों से नवरात्रि के समय दलित बालिकाओं को अपने घर पूजते आ रहे हैं लेकिन कभी दिखावा नहीं किया।' संघ से पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी 'दलितों के लिए आयोजित भोज में शामिल होने से यह कह कर मना कर दिया कि वह भगवान राम नहीं हैं, जो दलितों के साथ भोजन कर उन्हें पवित्र कर देंगी।' 

वहीं, बहराइच की भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने नेताओं के दलितों के घर भोजन करने को लेकर सवाल उठाए और उन (नेताओं) के इस कृत्य को दलितों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि ये जो परंपरा चल रही है, उसमें दलित वर्ग का सिर्फ अपमान हो रहा है। नेता दलित के घर खाना खाने जाते हैं लेकिन खाना बनाने वाला कोई और होता है, परोसने वाला कोई और...। बर्तन टेंट हाउस के होते हैं। 


दलितों पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से दलित कार्ड राजनीति का प्रमुख एजेंडा रहा है और बात जब चुनाव में मतदाताओं को लुभाने की हो तो यह कार्ड आन-बान की बात हो जाती है। दलित विरोधी छवि से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी दलितों को प्रभावित करने का हर दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 


पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेकिन कोई भी दलित कार्ड काम नहीं आ रहा है। चाहें दलितों के घर जाकर खाना खाने का हो या फिर उनके घर सोने का या बात करें उनके साथ उनकी परेशानियों को जानने का,भाजपा मंत्रियों का सारा दांव उल्टा ही पड़ता जा रहा है।

भाजपा के मंत्री, विधायक और सांसद अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

मामला उत्तर प्रदेश का है जहां योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को और बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घर जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है। योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी दलितों के यहां खाने को लेकर एक हास्यास्पद बयान दे डाला है उन्होंने कहा- मच्छर काटने के बावजूद मंत्री दलितों के घर रुक रहे हैं। 





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दलितों के घर में खाना खाने का दिखावा करने से बचने की सलाह दी है







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Thursday, 3 May 2018

BJP राष्ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह आज भोपाल दौरे पर, पार्टी बैठक को करेंगे संबोधित

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इंदौर: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को भोपाल के एकदिवसीय दौरे पर पहुंच रहे हैं. अमित शाह यहां पार्टी की प्रदेश स्तरीय विस्तारित बैठक को संबोधित करेंगे. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद राकेश सिंह ने बताया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सुबह 10.30 बजे विमान से स्टेट हैंगर (राज्य सरकार के हवाईअड्डे) पर पहुंचेंगे, जहां कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे. इसके बाद शाह सीधे कार्यक्रम स्थल भेल दशहरा मैदान पहुंचेगे और प्रदेशभर से आए पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. 


राकेश सिंह ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर अमित शाह के आगमन से पहले प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी और तत्पश्चात विस्तारित बैठक होगी. भाजपा प्रदेश कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अमित शाह कर्नाटक चुनाव की अत्यधिक व्यस्तता को देखते हुए बेंगलरू से सीधे भोपाल आएंगे और दो घंटे भोपाल में रहेंगे. अमित शाह कार्यक्रम के बाद बेंगलुरू रवाना होंगे. 



भाजपा संगठन ने एयरपोर्ट से भेल दशहरा मैदान तक अमित शाह के कार्यक्रम को रैली की शक्ल में आयोजित करने की तैयारी की है. तकरीबन 100 से ज्यादा स्वागत स्थल बनाए गए हैं. अमित शाह की रैली के रूट में लगे कमलनाथ के होर्डिंग नगर निगम ने हटा दिए हैं. 


इस बात से कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि प्रशासन बीजेपी के कब्जे में है, ऐसी क्या वजह है जो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैली की जा रही है. कमलनाथ और अमित शाह की रैली की तुलना करना बेईमानी है. कांग्रेस के होर्डिंग हटाए जाने पर सज्जन सिंह वर्मा का कहना था कि जिस तेजी से कांग्रेस के होर्डिंग हटाए गए हैं. उसी तेजी से अमित शाह के रोड शो के बाद उनके होर्डिंग हटाए जाएंगे तो यह अच्छा होगा. 




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"Release Them": Relatives Of Gaza Hostages Break Into Israeli Parliament Panel

A group of relatives of Israelis held hostage by Palestinian gunmen in Gaza rushed into a parliamentary committee session in Jerusalem on Mo...