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स्वीडिश अकादमी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘अकादमी की छवि को हुई क्षति और इसके प्रति लोगों में विश्वास की कमी को देखते हुए यह निर्णय किया गया.’
अकादमी ने कहा कि 2018 का पुरस्कार 2019 में दिया जाएगा.
बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनों के देरी से चलने की वजह से सैकड़ों की संख्या में यात्री इस ट्रेन की जनरल बोगियों में सवार हो गए. ट्रेन के रवाना होने से पहले रेलवे स्टॉफ ने रूटीन जांच के तहत ट्रेन के बोगियों का वेट प्रेशर जांचना शुरू किया.
दिल्ली से पटना जाने वाले यात्री राजधानी एक्सप्रेस के बाद इसी ट्रेन को तवज्जो देते हैं.
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 09:57 AM IST
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इस बातचीत को नीमराना डायलॉग नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि साल 1991-92 में राजस्थान के नीमराना किले में भारत और पाकिस्तान के बीच पहली बैठक हुई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि दोनों तरफ से व्यावहारिक आदान-प्रदान सामान्य प्रक्रिया के तौर पर जारी है। यह दो नागरिक समाज के बीच एक बैठक थी जोकि पीपुल टू पीपुल बातची का का हिस्सा है। इसमें कुछ नया नहीं है।
नीमराना डायलॉग की नए सिरे से शुरुआत करने के लिए हाल ही में भारत से एक दल इस्लामाबाद गया था। भारत की तरफ से जहां इस दल का प्रतिनिधित्व पूर्व विदेश सचिव और पाकिस्तान विशेषज्ञ विवेक काटजू और पूर्व एनसीईआरटी प्रमुख जेएस राजपूत ने किया था। वहीं पाकिस्तान की तरफ से पूर्व मंत्री जावेद जब्बर सहित दूसरे लोग मौजूद थे। यह बातचीत 28 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच हुई थी।
जब कुमार से पूछा गया कि क्या इस डायलॉग को मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है तो उन्होंने इसका सीधा जवाब ना देते हुए बस इतना कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रति भारत का रवैया साफ है जिसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हमारी स्थिति अब भी वही है कि वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी।
नीमराना डायलॉग की नए सिरे से शुरुआत करने के लिए हाल ही में भारत से एक दल इस्लामाबाद गया था। भारत की तरफ से जहां इस दल का प्रतिनिधित्व पूर्व विदेश सचिव और पाकिस्तान विशेषज्ञ विवेक काटजू और पूर्व एनसीईआरटी प्रमुख जेएस राजपूत ने किया था। वहीं पाकिस्तान की तरफ से पूर्व मंत्री जावेद जब्बर सहित दूसरे लोग मौजूद थे। यह बातचीत 28 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच हुई थी।
जब कुमार से पूछा गया कि क्या इस डायलॉग को मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है तो उन्होंने इसका सीधा जवाब ना देते हुए बस इतना कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रति भारत का रवैया साफ है जिसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हमारी स्थिति अब भी वही है कि वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी।
तेहरान: ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनी के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटने का फैसला करता है, तो ईरान भी विश्व शक्तियों के साथ हुए इस समझौते का हिस्सा नहीं रहेगा. सरकारी टेलीविजन वेबसाइट ने ईरान के विदेश नीति सलाहकार अली अकबर विलायती के हवाले से बताया, ‘‘अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटता है तो हम भी इस समझौते में नहीं बने रहेंगे.’’ ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को ‘‘बेकार’’ बताते हुए इससे हटने की धमकी दी है. 12 मई को इस समझौते का नवीकरण होना है.
ब्रिटेन में ईरान के दूत ने परमाणु समझौता रद्द करने की चेतावनी दी
इससे पहले ब्रिटेन में ईरान के दूत ने कहा था कि अमेरिका के परमाणु समझौते से पीछे हटने की सूरत में ईरान भी इससे बाहर होने पर विचार कर सकता है. ब्रिटेन में ईरान के शीर्ष राजदूत हामिद बेदिनेजाद ने 3 मई को प्रसारित हुए एक साक्षात्कार में यह बात कही थी. हामिद ने कहा कि अगर अमेरिका 2015 में हुए इस समझौते से पीछे हटता है तो ईरान भी “अपनी पिछली स्थिति में लौटने के लिए तैयार है.”
सीएनएन के साथ साक्षात्कार में ईरान के दूत ने कहा, “जब अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा तो इसका मतलब होगा कि कोई समझौता बचा ही नहीं.” उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक महत्त्वपूर्ण पक्ष ने संधि को निरस्त किया है और साफ तौर पर इसका उल्लंघन किया है.’’
ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे अमेरिका : संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं. इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था.
गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं." इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था.
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 03:18 AM IST
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
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एमएयू में जिन्ना की तस्वीर पर बुधवार को उठे बवाल पर मुख्यमंत्री ने सरकार कर नजरिया स्पष्ट करते हुए कहा कि, जिन्ना ने हमारे देश का बंटवारा किया। हम किस तरह जिन्ना की उपलब्धियों का बखान कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि देश में जिन्ना का महिमामंडन किसी हालत में बर्दाश्त योग्य नहीं है। सरकार ने एमएयू मामले में जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट आते ही एक्शन लिया जाएगा।
विश्वविद्यालय में तनाव बरकरार
वहीं बुधवार को हुए बवाल एवं लाठीचार्ज के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गुरुवार को भी तनाव बरकरार रहा। आक्रोशित छात्रों ने पुलिस-प्रशासन एवं मीडिया को निशाना बनाया तथा उनके ऊपर पत्थर फेंके। इससे विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार ‘बाब-ए-सैयद’ से लेकर एएमयू सर्किल तक भगदड़ मच गई।
छात्र नेताओं की ओर से भाजपा सांसद सतीश गौतम, संघ, विहिप, हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं एवं सीओ सिटी के खिलाफ एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी को तहरीर दी गई।
छात्रों ने एलान किया है कि जब तक एएमयू कैंपस में आकर चुनौती देने वाले हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका धरना जारी रहेगा। गुरुवार को जिलाधिकारी ने बुधवार के घटनाक्रम के मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।
एएमयू छात्रों की धरना सभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी, पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह भी शामिल हुए। छात्रों ने सांसद सतीश गौतम, योगी आदित्यनाथ एवं आरएसएस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एएमयू छात्रों पर लाठी चार्ज एवं आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद उनका आक्रोश सातवें आसमान पर है। बाब-ए-सैयद पर उनका धरना दूसरे दिन भी जारी है।
एएमयू के शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन दे दिया है। छात्रों ने पांच दिन तक अनेक शैक्षणिक कार्य बंद रखने का एलान किया है। छात्र गुरुवार को कक्षाएं, प्रैक्टिकल एवं परीक्षाएं स्थगित कर बाब-ए-सैयद पर पहुंच गये।
इसी बीच कवरेज के लिए पहुंचे मीडिया कर्मियों को देखकर छात्र भड़क गए और गोदी मीडिया का नारा लगाते हुए उन्हें दौड़ा दिया। इसमें एक महिला पत्रकार भी थी। मीडिया कर्मी किसी तरह कैमरा आदि लेकर भागे। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मीडिया कर्मियों को छात्रों के सामने से हटाया। दोपहर में भी ऐसी ही घटना हुई और एक मीडियाकर्मी को छात्रों ने दौड़ा दिया।
विश्वविद्यालय में तनाव बरकरार
वहीं बुधवार को हुए बवाल एवं लाठीचार्ज के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गुरुवार को भी तनाव बरकरार रहा। आक्रोशित छात्रों ने पुलिस-प्रशासन एवं मीडिया को निशाना बनाया तथा उनके ऊपर पत्थर फेंके। इससे विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार ‘बाब-ए-सैयद’ से लेकर एएमयू सर्किल तक भगदड़ मच गई।
छात्र नेताओं की ओर से भाजपा सांसद सतीश गौतम, संघ, विहिप, हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं एवं सीओ सिटी के खिलाफ एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी को तहरीर दी गई।
छात्रों ने एलान किया है कि जब तक एएमयू कैंपस में आकर चुनौती देने वाले हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका धरना जारी रहेगा। गुरुवार को जिलाधिकारी ने बुधवार के घटनाक्रम के मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।
एएमयू छात्रों की धरना सभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी, पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह भी शामिल हुए। छात्रों ने सांसद सतीश गौतम, योगी आदित्यनाथ एवं आरएसएस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एएमयू छात्रों पर लाठी चार्ज एवं आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद उनका आक्रोश सातवें आसमान पर है। बाब-ए-सैयद पर उनका धरना दूसरे दिन भी जारी है।
एएमयू के शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन दे दिया है। छात्रों ने पांच दिन तक अनेक शैक्षणिक कार्य बंद रखने का एलान किया है। छात्र गुरुवार को कक्षाएं, प्रैक्टिकल एवं परीक्षाएं स्थगित कर बाब-ए-सैयद पर पहुंच गये।
इसी बीच कवरेज के लिए पहुंचे मीडिया कर्मियों को देखकर छात्र भड़क गए और गोदी मीडिया का नारा लगाते हुए उन्हें दौड़ा दिया। इसमें एक महिला पत्रकार भी थी। मीडिया कर्मी किसी तरह कैमरा आदि लेकर भागे। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मीडिया कर्मियों को छात्रों के सामने से हटाया। दोपहर में भी ऐसी ही घटना हुई और एक मीडियाकर्मी को छात्रों ने दौड़ा दिया।
लोगों के प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता देने वाले सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसले हैं.
A group of relatives of Israelis held hostage by Palestinian gunmen in Gaza rushed into a parliamentary committee session in Jerusalem on Mo...