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Saturday, 5 May 2018

PM Narendra Modi in Gadag says, 'After May 15 Congress will become PPP Congress | VIDEO : पीएम मोदी बोले

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गडग (कर्नाटक) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को चुनावी रैली में कांग्रेस और जेडीएस पर तीखे हमले बोले. पहले तुमकुर में और बाद में गडग की चुनावी रैलियों में उन्‍होंने दोनों पार्टियों पर जमकर निशाना साधा. प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और जेडी (एस) के बीच ‘गुप्त’ समझौता हुआ है और एचडी देवगौड़ा की पार्टी कांग्रेस का ‘बचाव’ कर रही है. मोदी ने यहां एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्षों से सिर्फ वोट बटोरने के लिये गरीबी हटाने की बात करती रही है जबकि असल में उसने किसानों और गरीबों की अनदेखी की .


कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए उन्‍होंने कहा, 15 मई के बाद कांग्रेस पार्टी, पीपीपी कांग्रेस बन जाएगी. पीएम मोदी ने पीपीपी का अर्थ बताते हुए कांग्रेस को पंजाब, पुडुचेरी और परिवार कांग्रेस से जोड़ा. इन चुनावी रैलि‍यों में प्रधानमंत्री ने जेडीएस पर भी तीखा हमला बोला.


कर्नाटक चुनाव में जीत के लिए पीएम मोदी के समर्थकों ने निकाला अनूठा तरीका


उन्होंने कहा, ‘चुनावी सर्वेक्षण, राजनीतिक पंडित... हर किसी का यही कहना है कि जेडी (एस) कांग्रेस को नहीं हरा सकती. वे सरकार नहीं बना सकते. अब कर्नाटक में कोई सरकार बदल सकता है तो वह भाजपा है.’’ उन्होंने कहा, ‘अगर कोई कांग्रेस का बचाव कर रही है तो वह जेडी (एस) है. कांग्रेस और जेडी (एस) के बीच गोपनीय समझौता हुआ है. पर्दे के पीछे से साझेदारी चल रही है.’ मोदी ने कुछ ही दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री एवं जेडी (एस) के वरिष्ठ नेता एचडी देवगौड़ा की प्रशंसा की थी, लेकिन उन पर निशाना साधा.



मोदी ने मांग की कि कांग्रेस यह साफ करे कि उसका जेडी (एस) के साथ कोई गुप्त समझौता हुआ है या नहीं. उन्होंने कहा कि देवगौड़ा की पार्टी के समर्थन से ही कांग्रेस बेंगलुरु में अपना महापौर बना पायी. मोदी ने कहा, ‘आखिर आप यह छिपा क्यों रहे हैं? कांग्रेस को इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वह जनता से सच बोले.’ हालांकि मोदी ने जोर देकर कहा कि वह देवगौड़ा का सम्मान करते हैं. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले देवगौड़ा ने घोषणा की थी कि अगर वह (मोदी) प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह (देवेगौड़ा) आत्महत्या कर लेंगे.


VIDEO : पीएम मोदी ने कर्नाटक चुनाव प्रचार में क्‍यों किया 'लाल मिर्च, हरी मिर्च और आलू' का जिक्र


प्रधानमंत्री ने कहा कि देवगौड़ा ने उनका विरोध किया था, बावजूद इसके जब वह लोकसभा चुनावों में चुनाव प्रचार के लिये कर्नाटक पहुंचे तब उन्होंने यही कहा था कि जेडी (एस) नेता 100 साल जियें और समाज की सेवा करें. मोदी ने बीते मंगलवार को उडुपी में एक जनसभा के दौरान देवगौड़ा की प्रशंसा की थी और पूर्व प्रधानमंत्री का ‘अनादर’ करने के लिये कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आलोचना की थी. लेकिन दो दिन बाद ही बेंगलुरु में एक जनसभा में मोदी ने लोगों से कहा कि वे देवगौड़ा की पार्टी का समर्थन कर अपना वोट ‘बर्बाद’ नहीं करें क्योंकि चुनावों में यह पार्टी ‘बेहद खराब प्रदर्शन करते हुए तीसरे नंबर पर रहने वाली है.’


उन्होंने आरोप लगाया कि तुमकूर के पिछड़ेपन के लिये कांग्रेस जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य की पिछली कांग्रेस सरकारों की नीतियों के चलते किसानों को नुकसान झेलना पड़ा . मोदी ने कहा, ‘कर्नाटक के बेहतर भविष्य के लिये कांग्रेस को सबक सिखाना जरूरी है.’




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karnataka elections 2018 s m krishna supporters and relatives left bjp joined congress

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक दौरे के दौरान गुरुवार 3 अप्रैल को बेंगलुरू में पूर्व सीएम एस एम कृष्णा के साथ मंच पर नजर आए थे. कर्नाटक चुनाव से पहले पूर्व सीएम और पीएम के साथ दिखने को पार्टी के कर्नाटक में अपनी पकड़ बनाने के लिए उठाए गए मजबूत कदम के रूप में देखा गया. लेकिन बीजेपी के लिए कर्नाटक चुनाव में जीत हासिल करने की राह आसान नहीं होने वाली है. बेंगलुरु से महज 65 किलोमीटर दूर एस एम कृष्णा के ही गृहनगर मद्दुरु में बीजेपी बड़ी मुश्किल का सामना कर रही है. राज्य में खुला सबसे पहला पार्टी ऑफिस अब बंद हो चुका है. ऐसा इसलिए क्योंकि एस एम कृष्णा के समर्थक जो उनके साथ कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे, उन्होंने फिर से कांग्रेस का हाथ थाम लिया है.


नाराज होकर पिछले साल छोड़ी थी कांग्रेस
साल 2017 में एस एम कृष्णा सहित बड़ी संख्या में उनके समर्थकों ने कांग्रेस से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी थी. इन समर्थकों में से कई कृष्णा के रिश्तेदार भी थे. लेकिन एक हफ्ते ये वापस कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व की ओर से उन्हें उपेक्षित किया गया, जिस कारण उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला लिया. इसके साथ ही कर्नाटक में पांव जमाने के इरादे से मद्दुरु में खोला गया पहला बीजेपी ऑफिस और उसकी कमान संभालने वाले वहां के पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मण कुमार को पार्टी ने खो दिया.


टिकट नहीं मिलने से नाराज मद्दुरु अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, लक्ष्मण कुमार जिन्हें बीजेपी ने मद्दुरु का चीफ बनाया था उन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी का साथ छोड़ा. कुमार ने बताया कि, 'बीजेपी का इस इलाके में अस्तित्व भी नहीं था. मैंने मेहनत करके लगभग पूरे संगठन को तैयार किया. मुझसे वादा किया गया था कि मुझे टिकट दिया जाएगा, लेकिन अचानक किसी को और को चुन लिया गया. मैंने अपनी नाराजगी जाहिर की, लेकिन बीजेपी की ओर से कोई इस पर बात करने को तैयार नहीं था. इस वजह से मैं कांग्रेस में आ गया.'


जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मण कुमार की जगह बीजेपी ने सतीश को टिकट दिया है. लेकिन कुमार के जाने से अब इलाके में पार्टी का ऑफिस ही नहीं रह गया है. बीजेपी छोड़ने पर न सिर्फ कार्यालय से पार्टी का बोर्ड बल्कि उस पर लगे झंडे और सीएम उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा आदी के फोटो भी हटा दिए गए. अब इस इमारत पर कांग्रेस का झंडा लगा दिया गया है. इस बीच सतीश ने एक रिहायशी इलाके में अपना ऑफिस बनाया है.


एस एम कृष्णा के भतीजे भी कांग्रेस में हुए शामिल
एस एम कृष्णा के भतीजे गुरुचरण भी बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वालों में से एक हैं. उन्होंने बताया कि 'मेरे समर्थकों और मैंने निष्पक्ष रहने का फैसला किया था. लेकिन एस एम कृष्णा को जहां पीएम मोदी का साथ मिला वहीं गृहनगर में खुद को अकेला पाकर हम कांग्रेस में शामिल हो गए.' गुरुचरण ने आगे कहा कि 'एक साल पहले चाचा एस एम कृष्णा के साथ पार्टी छोड़ने पर हमसे किसी ने भी संपर्क नहीं किया. हम आखिर तक इंतजार करते रहे लेकिन कांग्रेस ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. कुछ दिनों पहले खुद सीएम सिद्धारमैया ने फोन कर कांग्रेस में वापस शामिल होने का अनुरोध किया, जिसे हमने मान लिया. हमें लगता है कि इस तरीके से हम बेहतर तरीके से विपक्षी पार्टी जेडी(एस) का सामना कर पाएंगे और लोगों के लिए भी कुछ अच्छा कर सकेंगे.'


भले ही एस एम कृष्णा के समर्थक व उनके रिश्तेदारों ने फिर से कांग्रेस का हाथ थाम लिया हो, लेकिन वे खुद भाजपा के साथ बने रहेंगे. सूत्रों की मानें तो रैली के दौरान पीएम मोदी के साथ कर्नाटक पूर्व सीएम का मंच पर दिखाई देना इसका साफ इशारा था.


कर्नाटक चुनाव से पहले बीजेपी ने पार्टी को मजबूती देने के लिए एस एम कृष्णा को अपने साथ शामिल किया था. साल 1999 से 2004 तक राज्य के सीएम रहने वाले कृष्णा के जरिए पार्टी अपनी छवि मजबूत करना चाहती थी. लेकिन कुछ रैलियों के अलावा वे बीजेपी के किसी भी अन्य चुनावी प्रचार में कम ही नजर आए हैं.




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Narendra Modi Rallies Karnataka Assebly Election Bjp Congress News And Updates

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बेंगलुरु.नरेंद्र मोदी शनिवार को कर्नाटक के टुमकुर में कहा कि कांग्रेस कई सालों तक गरीब-गरीब चिल्लाती रही। लेकिन जब देश ने एक गरीब परिवार के व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन लिया तो उसने ये कहना बंद कर लिया। मोदी आज कर्नाटक में गड़ाग, शिमोगा और मैंगलुरु में भी सभाएं करेंगे। विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान होगा, 15 को नतीजे आएंगे।

वो तो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं

- मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा, "अब कांग्रेस वालों ने ऊपर से नीचे तक, लोकल हो, देशी हो या विदेशी हो, इधर से हो या उधर से हो, समझ हो या न हो, चना का पेड़ होता है या पौधा होता है, लाल मिर्च होती है या हरी, इसका भी जिनको ज्ञान नहीं है। जो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं। वो अब दिन-रात किसान-किसान बोल रहे हैं।"
- "इंदिरा गांधी के समय से लेकर कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए गरीबों को मूर्ख बना रही है। कांग्रेस एक झूठ बोलने वाली पार्टी है। वे एक बार फिर चुनाव जीतने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। न तो उन्हें किसानों की चिंता है और न ही गरीबों की। लोग अब कांग्रेस से थक चुके हैं।"
- "कर्नाटक के लोगों को कांग्रेस और जेडीएस के अनकहे गठबंधन को समझना चाहिए। वे लड़ते दिख तो रहे हैं लेकिन बेंगलुरु में जेडीएस, कांग्रेस के एक मेयर को समर्थन कर रही है।"

टुमकुरु महान लोगों की भूमि
- मोदी ने कहा, "टुमकुरु महान लोगों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैं यहां आया था और सिद्धगंगा मठ के स्वामी शिवकुमार का आशीर्वाद लिया था।"

- "टुमकुरु के लोगों को हेमावती नदी का पानी क्यों नहीं मिल पा रहा? सिंचाई के क्षेत्र में बीते 30 साल से कोई काम नहीं हुआ। कांग्रेस की रुचि तो केवल कालाधन भरने में है। "



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Thursday, 3 May 2018

Congress Gives Support To Cpi (m) In Maheshtala By Election In West Bengal - प. बंगाल के महेशतला उपचुनाव में कांग्रेस ने माकपा को दिया समर्थन

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ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता
Updated Thu, 03 May 2018 10:59 PM IST



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पश्चिम बंगाल के महेशतला विधानसभा सीट पर 28 मई को होने वाले उपचुनाव में माकपा उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे दोनों दलों के एक बार फिर करीब आने का संकेत मिलता है। इन दोनों दलों ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में तालमेल किया था। लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए थे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि उनकी पार्टी के महेशतला उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने की संभावना नहीं है। वर्ष 2016 में भी उस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मैदान में नहीं थे। 

पार्टी इस बार भी वहां माकपा उम्मीदवार को समर्थन देगी। ध्यान रहे कि तृणमूल कांग्रेस की महिला विधायक कस्तूरी दास के निधन की वजह से महेशतला सीट पर उपचुनाव हो रहा है। पार्टी ने इस बार यहां कस्तूरी के पति बिलाल दास को अपना उम्मीदवार बनाया है।



पश्चिम बंगाल के महेशतला विधानसभा सीट पर 28 मई को होने वाले उपचुनाव में माकपा उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे दोनों दलों के एक बार फिर करीब आने का संकेत मिलता है। इन दोनों दलों ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में तालमेल किया था। लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए थे।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि उनकी पार्टी के महेशतला उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने की संभावना नहीं है। वर्ष 2016 में भी उस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मैदान में नहीं थे। 

पार्टी इस बार भी वहां माकपा उम्मीदवार को समर्थन देगी। ध्यान रहे कि तृणमूल कांग्रेस की महिला विधायक कस्तूरी दास के निधन की वजह से महेशतला सीट पर उपचुनाव हो रहा है। पार्टी ने इस बार यहां कस्तूरी के पति बिलाल दास को अपना उम्मीदवार बनाया है।





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Wednesday, 2 May 2018

BJP And Congress Face Tough Fight Between SC And ST Seats In Karnataka

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  • एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और देश भर में दलित आंदोलनों से भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हैं।
  • 224 में से करीब 100 सीटों पर दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर्स का असर।

बेंगलुरु.देश भर में पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट पर फैसले के बाद काफी विरोध-प्रदर्शन हुए। केंद्र सरकार ने इसे देखते हुए फैसले के विरोध में तुरंत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की थी। इसकी एक बड़ी वजह कर्नाटक चुनाव भी था, क्योंकि राज्य में दलित और आदिवासी समुदाय के करीब 26% वोटर हैं। वहीं, राज्य से भाजपा के केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि संविधान में बदलाव होना चाहिए। इसका राज्य में काफी विरोध हुआ था।

100 सीटों पर प्रभाव
- कर्नाटक में विधानसभा की 224 में 36 सीटें एससी और 15 एसटी के लिए सुरक्षित हैं। राज्य में करीब 100 सीटों पर अच्छी खासी तादाद में दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर हैं। राज्य की करीब 60 सीटों पर दलित समुदाय और 40 सीटों पर आदिवासी समुदाय के वोटर असर डालते हैं।

- 2014 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा वार सीटों पर बढ़त के लिहाज से भाजपा 36 एससी सीटों में से 18 और कांग्रेस 16 सीटों पर आगे थी। वहीं, एसटी सीटों पर भाजपा 8 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे थी। अब भाजपा ने इन सीटों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। वहीं, कांग्रेस भी जमकर मेहनत कर रही है।

सीएम सिद्दारमैया ने तीन समुदायों को मिलाकर अहिंदा बनाया है

- अहिंदा कन्नड़ शब्दों अल्पसंख्यातरू (अल्पसंख्यक), हिंदुलिदावरु मट्टू (पिछड़ी जातियां) और दलितरु (दलितों) का शॉर्ट फॉर्म है। इस समुदाय के कर्नाटक में करीब 60% वोटर हैं। सीएम सिद्दारमैया ने इनके लिए कई योजनाएं चला रखी हैं। सिद्दारमैया भी ओबीसी हैं। वह खुद को भी अहिंदा बताते रहे हैं।

- कांग्रेस के सीएम सिद्दारमैया दलित और आदिवासियों के लिए कई योजानाएं लॉन्च कर चुके हैं। इनमें गरीबों के लिए मुफ्त में अनाज, छात्रों के लिए दूध और किसानों के लिए बिना ब्याज के कर्ज आदि शामिल हैं। चुनाव से पहले उन्होंने एससी और एसटी समुदाय के लिए 23 करोड़ रु. की कई योजनाएं भी शुरू की थीं।

2014 के आम चुनाव में विधानसभा सीटों पर पार्टियों की बढ़त
समुदायकांग्रेसभाजपाजेडीएसकुल
एससी16180236
एसटी07080015
जनरल5410613173
कुल7713215224

कर्नाटक में परिवारवाद: भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के 52 सगे मैदान में

- कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस ने परिवारवाद की पूरी फौज चुनावी मैदान में उतार रखी है। राज्य में 12 मई को होने वाले वोटिंग के लिए 2,655 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 2436 पुरुष और 219 महिला हैं।

- राजनीतिक दलों के परिवारवाद को देखें तो कुल 52 सगे-संबंधी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कर्नाटक में जेडीएस को तो पिता-पुत्र की पार्टी के नाम से जाना ही जाता है। पर इस मामले में कांग्रेस और भाजपा भी ज्यादा पीछे नहीं है। दोनों पार्टियों ने चुनाव जीतने के फॉर्मूले पर अपने नेताओं के सगे-संबंधियों को खूब टिकट दिए हैं।

- जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के दोनों बेटे-बहू चुनाव मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवारों के बेटे भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।

# प्रमुख बड़े नेताओं के ये करीबी मैदान में हैं

1) एचडी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री): जेडीएस चीफ
- बेटा एचडी रेवन्ना, एचडी कुमारस्वामी, बहू- भवानी रेवन्ना, अनिथा कुमारस्वामी

2) सिद्दारमैया: मुख्यमंत्री
- खुद 2 सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, बेटे- यतींद्र भी मैदान में हैं।

3) बीएस येद्दियुरप्पा: भाजपा के सीएम उम्मीदवार
- इनके अलावा बड़ा बेटा राघवेंद्र चुनाव मैदान में हैं।

4) गृह मंत्री रामलिंगा रेड्‌डी
- बेटी सोमैया रेड्‌डी भी लड़ रहीं।

5) कानून मंत्री टीवी जयेंद्र
- बेटा संतोष जयचंद।

6) भाजपा नेता जनार्दन रेड्‌डी
- इनके दोनों भाई- सोमेश्वर, करुणाकरण रेड्‌डी मैदान में।

7) मल्लिकार्जुन खड़गे
- बेटा प्रियांक खड़गे कलबुर्गी से।

8) वीरप्पा मोइली
- बेटा हर्ष मोईली भी लड़ रहे हैं।

9) मार्ग्रेट अल्वा
- इनकी बेटी निवेदिता अल्वा कांग्रेस के टिकट पर हैं।



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