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Friday, 4 May 2018

ZEE जानकारीः ड्राइविंग करते वक्त किया मोबाइल का इस्तेमाल तो कैंसिल होगा लाइसेंस

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अगर भारत में गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को एक गंभीर अपराध मान लिया जाए तो देश के कम से कम 30 प्रतिशत लोग जेल के अंदर होंगे. आपने अक्सर लोगों को Driving के दौरान मोबाइल फोन पर बात करते हुए या Message करते हुए देखा होगा. हो सकता आप भी ऐसा करते हो . ऐसे लोगों को ये बात याद रखनी चाहिए कि गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से, दिमाग का Reaction time 204 प्रतिशत कम हो जाता है. यानी दिमाग एकदम सुस्त और लापरवाह हो जाता है. इसकी वजह से किसी की जान भी जा सकती है लेकिन ये बात हमारे देश के लोगों को अब तक समझ में नहीं आई है. ऐसे लोगों को समझाने के लिए कानून के डंडे की ज़रूरत पड़ती है .आपने देखा होगा कि जो काम हमारे देश में सिस्टम और सरकारें कई वर्षों में नहीं कर पातीं वो काम... कई बार अदालतें चुटकियों में कर देती हैं. इस बार ये काम राजस्थान हाइकोर्ट में हुआ है . 


राजस्थान हाइकोर्ट ने राजस्थान सरकार को ये आदेश दिया है कि गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस Cancel कर दिया जाए . ये एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे पूरे देश में लागू करने की ज़रूरत है . आपने देखा होगा कि कुछ बीमारियां दवाइयों से ठीक नहीं हो पाती. ऐसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने के लिए सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है. गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी एक ऐसी बीमारी है जिसके लिए बड़े पैमाने पर सर्जरी की ज़रूरत है.


वर्ष 2016 में मोबाइल फोन पर बात करने की वजह से  4 हज़ार 976 सड़क हादसे हुए थे जिनमें 2 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गये थे. किसी भी हादसे के बाद अकसर ये कहा जाता है कि भगवान की मर्ज़ी के आगे किसी की नहीं चलती.. लेकिन ये भगवान की मर्ज़ी नहीं... लापरवाह लोगों की खुदगर्ज़ी है. लोगों की इस लापरवाह सोच को समझने के लिए देश के 8 बड़े शहरों में एक सर्वे किया गया. इसमें 47 प्रतिशत लोगों ने माना कि वो गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन पर बात करते हैं. 


34% लोगों ने कहा कि फोन पर बात करते हुए उन्हें कई बार अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और वो किसी तरह सड़क हादसे से बाल-बाल बच जाते हैं. एक survey के मुताबिक भारत के हर 10 में से 3 नागरिक ऐसे हैं, जो Driving करते वक्त Phone का इस्तेमाल करते हैं. हर 10 में से 3 भारतीय नागरिक, गाड़ी चलाते वक्त, या तो Phone से Message भेजते हैं, E-mail करते हैं या फिर Social Media को Access करते हैं. IIT Bombay की एक स्टडी के मुताबिक गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से दिमाग का Reaction time 204 प्रतिशत कम हो जाता है. यानी इस दौरान आपका दिमाग मोबाइल फोन में उलझ जाता है और ध्यान भटकने की वजह से गाड़ी चलाने में लापरवाही हो जाती है . 


अगर गाड़ी चलाते हुए आप मोबाइल फोन पर कोई Message Type करते हैं तो आपके दिमाग का Reaction Time 204 प्रतिशत कम हो जाता है. यानी सड़क पर आपका ध्यान और सतर्कता कई गुना कम हो जाते हैं. और जब आप फोन पर बात करते हैं तो आपके दिमाग का Reaction time 40 प्रतिशत कम हो जाता है. गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले को अक्सर ये लगता है कि वो सब कुछ देख रहा है. लेकिन ऐसा होता नहीं है. इस दौरान आपका दिमाग 50% से भी ज़्यादा देखी गई चीज़ों को नज़र अंदाज़ कर देता है.  


अक्सर चालान से बचने के लिए ज़्यादातर लोग Driving के दौरान hands free या Ear Phone का इस्तेमाल करते हैं.. और किसी तरह पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं. ये चालाकी आपको चालान से तो बचा सकती है लेकिन हादसे से नहीं. हाल ही में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक स्कूल बस की ट्रेन से टक्कर हो गई थी. और उस स्कूल बस का ड्राइवर भी कान में Earphone लगाकर गाड़ी चला रहा था और उसे किसी की बात सुनाई नहीं दे रही थी. इस लापरवाही की वजह से 13 बच्चों की मौत हो गई थी. कुल मिलाकर इस रिसर्च का सार ये हैं कि गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना छोड़ दीजिए वर्ना ये गलती आपकी और सड़क पर चलने वाले लोगों की जिंदगी ख़तरे में डाल सकती है .


हमारे देश के लोगों में नियम-कानून के प्रति सम्मान की भावना बहुत कम है. वो सड़कों पर अपनी मर्ज़ी के हिसाब से चलना चाहते हैं . सड़क पर ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई के दौरान अक्सर लोग ये कहते हैं कि तुम जानते नहीं मैं कौन हूं....मेरी पहचान ऊपर तक है . ऐसे लोगों को अगर नॉर्थ कोरिया के कानून बारे में पता चल जाए तो उनकी ये अकड़ कम हो सकती है . नॉर्थ कोरिया एक ऐसा देश है जहां सिर्फ़ तानाशाह किम जोंग उन.. का कानून चलता है... और वहां ज़रा सी लापरवाही पर सज़ा-ए-मौत दे दी जाती है. हालांकि पिछले कुछ समय से किम जोंग उन.. के व्यवहार में कुछ नरमी आई है . और वो दोस्ती की भाषा बोलने लगे हैं.




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Time Match of North Korea and South Korea । ZEE जानकारीः दोनों नेताओं की मुलाकात के एक हफ्ते बाद North और South Korea समय भी मिला

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पिछले हफ़्ते North Korea और South Korea ने अपनी 68 साल पुरानी दुश्मनी को भूलकर एक दूसरे से हाथ मिलाया था. अब करीब एक हफ़्ते बाद इन दोनों देशों ने अपनी घड़ियां मिला ली हैं. North Korea और South Korea के रिश्तों वाली घड़ी 68 वर्षों से रुकी हुई थी. लेकिन, अब वक़्त बदल गया है. दीवार पर टंगी दो घड़ियों की ये तस्वीर 29 अप्रैल 2018 की है. ये उसी Peace House की तस्वीर है, जहां North Korea के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और South Korea के राष्ट्रपति Moon Jae-in की मुलाकात हुई थी. अगर आप दोनों घड़ियों को ध्यान से देखेंगे, तो ये पाएंगे, कि दोनों के समय में आधे घंटे का अंतर है. 


बांई तरफ की घड़ी South Korea के मुताबिक 11 बजकर 45 मिनट का समय दिखा रही है. जबकि दांई तरफ की घड़ी में North Korea के मुताबिक 11 बजकर 15 मिनट का समय दिख रहा है. अब आधे घंटे के इस फर्क की वजह को समझिए. किम जोंग उन.. ने वर्ष 2015 में Pyongyang Time बनाया था. इसके तहत North Korea ने अपना मानक समय South Korea से 30 मिनट पीछे कर लिया था. यानी पिछले 3 वर्षों से North Korea का समय South Korea से आधे घंटे पीछे चल रहा था. 


किम जोंग उन.. ने ये फैसला इसलिए लिया था, क्योंकि उपनिवेश काल से पहले North Korea का यही Time Zone, हुआ करता था. सन 1910 से लेकर 1945 तक North Korea पर जापान का शासन था. और उस वक्त जापान ने North Korea के Time को Tokyo के बराबर करने के लिए उसे आधा घंटा आगे कर दिया था. वर्ष 1945 में जापान के अधिकार क्षेत्र से बाहर आने के बावजूद, North Korea का Time Zone वर्ष 2015 तक नहीं बदला गया. फिर किम जोंग उन.. ने इस समय को अपने इतिहास के मुताबिक ठीक किया.


27 अप्रैल 2018 को जिस वक्त नॉर्थ और साउथ कोरिया के नेताओं की हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें दुनिया देख रही थीं. उस वक्त किम जोंग उन थोड़े उदास थे. क्योंकि, जिस कमरे में बैठकर वो South Korea के राष्ट्रपति का इंतज़ार कर रहे थे, उसी कमरे की दीवार पर ये दोनों घड़ियां टंगी हुई थीं. Media रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने उस दिन ये कहा था, कि दीवार पर टंगी हुई घड़ियों में Seoul Time और Pyongyang Time देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई. और उसी वक्त उन्होंने ये फैसला किया, कि दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए, घड़ियों का समय मिलाना ज़रुरी है.


North Korea की आधिकारिक समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, किम जोंग उन ने South Korea के Time Zone के हिसाब से वक्त मिलाने के लिए, अपने देश की घड़ियों को 30 मिनट आगे करने का फैसला लिया. वहां की संसद ने भी South Korea के Time Zone को अपनाने पर अपनी मंज़ूरी दे दी थी. और अब से कुछ देर पहले दोनों देशों की घड़ियों का वक्त एक जैसा हो गया है. North Korea का समय भारत के मुकाबले 3 घंटे आगे चलता है. इसलिए वहां पर तारीख बदल चुकी है, वहां पर 5 मई की तारीख शुरू हो चुकी है. 


South Korea ने किम जोंग उन के इस फैसले की तारीफ की है और कहा है, कि इस प्रतीकात्मक कदम से दोनों देशों के रिश्ते और भी ज़्यादा मज़बूत होंगे. इसके लिए South Korea ने भी एक अहम फैसला लिया है. जिसके तहत, वो अपने सीमावर्ती इलाकों में North Korea के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Loudspeakers को हटा लेगा. इन दोनों ही देशों ने, Propaganda करने के लिए अपनी सरहदों पर सैकड़ों लाउडस्पीकर्स लगाए हुए हैं. लेकिन अब इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया गया है.




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How E-Commerce Websites write Fake Reviews । ZEE जानकारीः भरोसेमंद E-Commerce Websites पर भी किस तरह लिखे जाते हैं Fake Reviews

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आजकल जब भी आप कोई चीज़ खरीदते हैं, कोई Hotel Book करते हैं, कोई Restaurant Book करते है, या कोई गाड़ी खरीदते हैं तो उससे पहले Online Reviews ज़रूर पढ़ते हैं. इन Reviews को पढ़ते हुए धीरे धीरे हमारा भरोसा बढ़ता है और हम इन्हीं Reviews के आधार पर कोई Product खरीद लेते हैं या फिर किसी सर्विस के लिए पैसे दे देते हैं. लेकिन ये युग बेईमानी और मिलावट का युग है और अब Online Reviews में Fake Reviews की मिलावट होने लगी है. अब तमाम कंपनियां, Fake Reviews की मदद से अपनी तिजोरियां भर रही हैं और ये सब कुछ आपके भरोसे की कीमत पर हो रहा है. आज हम आपको बताएंगे कि Internet पर विश्वसनीय मानी जाने वाली E-Commerce Websites पर भी किस तरह Fake Reviews लिखे जाते हैं और आपको किस तरह धोखा दिया जाता है. 


इसके लिए हम London में रहने वाले एक ऐसे व्यक्ति की मदद लेंगे, जिसने सिर्फ एक फोन नंबर और कुछ फर्ज़ी तस्वीरों की मदद से Fake Reviews के इस पूरे खेल को Expose कर दिया. ये एक दिलचस्प कहानी है, जिसे देखकर आप जागरूक बनेंगे और Fake Reviews के जाल में फंसने से बच जाएंगे. लेकिन इससे पहले कुछ ज़रुरी बातें. एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर में 97 फीसदी लोग, कोई भी सामान खरीदने से पहले, और Hotel या Restaurant में किसी भी तरह की Booking से पहले, Online Reviews पढ़ते हैं. Global Information Measurement Company, Nielsen के आंकड़े कहते हैं, कि दुनियाभर में 66 फीसदी लोग Online Reviews पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं. जबकि Asia Pacific में ये आंकड़ा 70 फीसदी लोगों का है.


पिछले वर्ष एक रिपोर्ट आई थी, जिसका नाम था - Asia Pacific Fraud Insights. इससे ये पता चला था कि भारत में हर दूसरा आदमी Online Fraud का शिकार है. रिपोर्ट में कहा गया था, कि भारत के 48 प्रतिशत Online Users, किसी ना किसी रुप में धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं. और इसमें Fake Online Reviews भी शामिल हैं. इस रिपोर्ट में भारत सहित एशिया के दस देशों को शामिल किया गया था. ध्यान देने वाली बात ये है, कि Asia Pacific region में इंडोनेशिया के बाद भारत दूसरा ऐसा देश है, जहां सबसे ज़्यादा Digital धोखाधड़ी होती है.


अलग-अलग Reports के मुताबिक Online क्षेत्र में ऐसी कई एजेंसियां सक्रिय हैं, जो किसी सामान या Service को अच्छा या बुरा बताने के लिए Fake Reviews लिखवाती हैं. यानी Fake Reviews लिखने वाले शार्प शूटर ठेके पर रखे जाते हैं और वो किसी कंपनी के पक्ष में या विरोध में Reviews लिखते रहते हैं. जबकि हम और आप जैसे आम लोगों को कभी इस गोलमाल का पता नहीं चलता. और इसके लिए Fake Reviews लिखने वालों को पैसा या अन्य लुभावने Offers दिए जाते हैं.


हाल ही में एक जांच ये में पाया गया था, कि Amazon और Trust Pilot जैसी Websites पर कई ऐसे Reviews थे, जो पूरी तरह से फर्ज़ी थे. और उन Reviews को लिखने वालों को पैसा या फिर उपहार दिए गए थे. हालांकि यहां हम साफ कर दें कि Amazon या Trust Pilot जैसी Websites पर Fake Reviews होने का मतलब ये नहीं है, कि इस धोखाधड़ी में ये Websites भी शामिल हैं. आम तौर पर Fake Reviews का ये पूरा कारोबार वो Vendors करते हैं, जो इन Websites की मदद से अपना सामान बेचते हैं.


अब आपको उस व्यक्ति के बारे में बताते हैं, जिसने Fake Reviews वाले काले बाज़ार की पहली झलक दुनिया को दिखाई है. इस व्यक्ति का नाम है, Oobah Butler, जो एक Freelance Writer हैं. ये व्यक्ति कभी मशहूर Website, Trip Advisor पर Restaurants के लिए Fake Reviews लिखने का काम करता था. एक दिन इस व्यक्ति को लगा, कि क्यों ना एक कदम आगे बढ़कर, एक नकली Restaurant शुरू किया जाए, जिसका असलियत में कोई वजूद ही ना हो. इस व्यक्ति ने सोचा था कि ऐसा करने से Fake Reviews का पूरा कारोबार एक झटके में Expose हो जाएगा. 


इसके लिए इसने अपने घर का इस्तेमाल किया. और एक फर्ज़ी Restaurant बना दिया. इसके बाद इसने एक Website बनाई और उसमें खाने-पीने से जुड़ी कुछ तस्वीरें Post कर दीं. ये तस्वीरें भी फर्ज़ी थीं. इस Website पर Restaurant की खासियतें बताते हुए ये लिखा गया, कि वहां Mood के हिसाब से खाना मिलता है. इसके बाद इस Restaurant को Trip Advisor नामक Website पर Register करवाया गया. और इसके लिए इस आदमी ने अपना ही फोन नंबर दे दिया.


कुछ दिनों के बाद Trip Advisor की तरफ से Restaurant के Registration की सूचना भी आ गई. इसके बाद इस व्यक्ति ने अपने दोस्तों की मदद से इस फर्ज़ी Restaurant के बारे में Fake Reviews लिखने शुरु कर दिए. Restaurant की Website पर ये लिखा गया था, कि वहां पर लोग सिर्फ बुकिंग के ज़रिए ही आ सकते हैं और वो बुकिंग सिर्फ फ़ोन से होगी. शुरुआत में Trip Advisor पर इस Restaurant की Rank, 18 हज़ार 190 थी. लेकिन, Fake Reviews की वजह से ये फर्ज़ी Restaurant लोगों के बीच मशहूर होता चला गया. और इसकी Rank बढ़ती चली गई. 


और देखते ही देखते ये Restaurant 30वें नंबर पर पहुंच गया. जब लोग इस Restaurant में बुकिंग के लिए फोन करते थे, तो हर बार उन्हें Waiting List में डाल दिया जाता था. लोगों को शक न हो, इसके लिए बीच में कुछ Fake Reviews डाल दिए जाते थे. जिनमें लोग ये लिखते थे कि दो हफ्ते के इंतजार के बाद आखिरकार उनका नसीब खुला और उन्हें इस Restaurant में जाने का मौका मिला. इन Fake Reviews को पढ़कर लोगों की दिलचस्पी बढ़ती चली गई. और Trip Advisor पर Register होने के 7 महीने के बाद ये Restaurant, London का नंबर वन Restaurant बन गया. 


लेकिन नकली Restaurant के असली मेहमानों वाली कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती. इसके बाद भी बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो हैरान कर देने वाला है. और इसके लिए आपको हमारी ये रिपोर्ट देखनी चाहिए. Wion Channel ने Fake Reviews वाले काले बाज़ार का खुलासा करने वाले इस Freelance Writer से बात भी की है. WION ने Amazon, Flipkart और eBay जैसी मशहूर E-Commerce Websites से Fake Reviews को लेकर प्रतिक्रिया मांगी है. इस पर Amazon का एक छोटा सा जवाब आया है. Amazon ने कहा है कि उनकी टीम का कोई सदस्य इस मामले को लेकर संपर्क करेगा. जबकि FlipKart और eBay की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है.


प्रशंसा बहुत मीठा शब्द है . तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है . अक्सर जब भी किसी Product की तारीफ होती है तो उसे हर कोई खरीदना चाहता है लेकिन आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि इस तारीफ में भी मिलावट हो सकती है. अब आपको बताते हैं कि Fake Reviews को पहचानने का तरीका क्या है? Fake Reviews लिखने वाले लोग कभी भी अपने बारे में जानकारी नहीं देते हैं . अक्सर ये देखा जाता है कि जो लोग Fake Reviews देते हैं वो या तो Product को बहुत अच्छा बताते हैं या फिर बहुत ज़्यादा खराब . यानी उनका Review संतुलित नहीं होता. क्योंकि वो Product इस्तेमाल  किए बिना ही Reviews लिखते हैं . इसकी एक वजह ये भी है कि उन्हें किसी Product को अच्छा या बुरा बताने के लिए ही पैसे मिलते हैं, संतुलित और सच्ची बातें लिखने के लिए पैसे नहीं मिलते.


अगर आपको किसी Product पर एक ही समय पर.. बहुत ज़्यादा Reviews दिखाई दें . तो इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि ये Reviews फर्जी होंगे. क्योंकि अक्सर कुछ कंपनियां अपने Products की Marketing के लिए Fake Reviews देने वाले लोगों को Hire करती हैं. जिनका मकसद जल्दी से जल्दी Product की Rating बढ़ाना होता है . Fake Reviews में अक्सर सामान्य बातें लिखी होती हैं . Product को लेकर बहुत कम जानकारी दी जाती है . यानी Product के बारे में Details नहीं दिए जाते. ऐसे Reviews किसी भी Product पर Fit किए जा सकते हैं . और ऐसा नहीं लगता है कि ये Reviews, Product इस्तेमाल करने के बाद लिखे गए हैं . 


Fake Reviews लिखने वाले लोग अक्सर बहुत छोटे वाक्यों का इस्तेमाल करते हैं . मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सच बोलने की तुलना में झूठ बोलने में ज़्यादा दिमागी ताकत खर्च होती है . इसका असर शब्दावली पर पड़ता है. इसके अलावा Fake Reviews लिखने वाले लोग व्याकरण संबंधी गलतियां करते हैं. कुल मिलाकर Fake Reviews हों या Fake News दोनों ही आपके भरोसे को तोड़ते हैं. और इन दोनों का पता लगाना मुश्किल होता है.




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