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Saturday, 5 May 2018

PM Narendra Modi in Gadag says, 'After May 15 Congress will become PPP Congress | VIDEO : पीएम मोदी बोले

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गडग (कर्नाटक) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को चुनावी रैली में कांग्रेस और जेडीएस पर तीखे हमले बोले. पहले तुमकुर में और बाद में गडग की चुनावी रैलियों में उन्‍होंने दोनों पार्टियों पर जमकर निशाना साधा. प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और जेडी (एस) के बीच ‘गुप्त’ समझौता हुआ है और एचडी देवगौड़ा की पार्टी कांग्रेस का ‘बचाव’ कर रही है. मोदी ने यहां एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्षों से सिर्फ वोट बटोरने के लिये गरीबी हटाने की बात करती रही है जबकि असल में उसने किसानों और गरीबों की अनदेखी की .


कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए उन्‍होंने कहा, 15 मई के बाद कांग्रेस पार्टी, पीपीपी कांग्रेस बन जाएगी. पीएम मोदी ने पीपीपी का अर्थ बताते हुए कांग्रेस को पंजाब, पुडुचेरी और परिवार कांग्रेस से जोड़ा. इन चुनावी रैलि‍यों में प्रधानमंत्री ने जेडीएस पर भी तीखा हमला बोला.


कर्नाटक चुनाव में जीत के लिए पीएम मोदी के समर्थकों ने निकाला अनूठा तरीका


उन्होंने कहा, ‘चुनावी सर्वेक्षण, राजनीतिक पंडित... हर किसी का यही कहना है कि जेडी (एस) कांग्रेस को नहीं हरा सकती. वे सरकार नहीं बना सकते. अब कर्नाटक में कोई सरकार बदल सकता है तो वह भाजपा है.’’ उन्होंने कहा, ‘अगर कोई कांग्रेस का बचाव कर रही है तो वह जेडी (एस) है. कांग्रेस और जेडी (एस) के बीच गोपनीय समझौता हुआ है. पर्दे के पीछे से साझेदारी चल रही है.’ मोदी ने कुछ ही दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री एवं जेडी (एस) के वरिष्ठ नेता एचडी देवगौड़ा की प्रशंसा की थी, लेकिन उन पर निशाना साधा.



मोदी ने मांग की कि कांग्रेस यह साफ करे कि उसका जेडी (एस) के साथ कोई गुप्त समझौता हुआ है या नहीं. उन्होंने कहा कि देवगौड़ा की पार्टी के समर्थन से ही कांग्रेस बेंगलुरु में अपना महापौर बना पायी. मोदी ने कहा, ‘आखिर आप यह छिपा क्यों रहे हैं? कांग्रेस को इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वह जनता से सच बोले.’ हालांकि मोदी ने जोर देकर कहा कि वह देवगौड़ा का सम्मान करते हैं. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले देवगौड़ा ने घोषणा की थी कि अगर वह (मोदी) प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह (देवेगौड़ा) आत्महत्या कर लेंगे.


VIDEO : पीएम मोदी ने कर्नाटक चुनाव प्रचार में क्‍यों किया 'लाल मिर्च, हरी मिर्च और आलू' का जिक्र


प्रधानमंत्री ने कहा कि देवगौड़ा ने उनका विरोध किया था, बावजूद इसके जब वह लोकसभा चुनावों में चुनाव प्रचार के लिये कर्नाटक पहुंचे तब उन्होंने यही कहा था कि जेडी (एस) नेता 100 साल जियें और समाज की सेवा करें. मोदी ने बीते मंगलवार को उडुपी में एक जनसभा के दौरान देवगौड़ा की प्रशंसा की थी और पूर्व प्रधानमंत्री का ‘अनादर’ करने के लिये कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आलोचना की थी. लेकिन दो दिन बाद ही बेंगलुरु में एक जनसभा में मोदी ने लोगों से कहा कि वे देवगौड़ा की पार्टी का समर्थन कर अपना वोट ‘बर्बाद’ नहीं करें क्योंकि चुनावों में यह पार्टी ‘बेहद खराब प्रदर्शन करते हुए तीसरे नंबर पर रहने वाली है.’


उन्होंने आरोप लगाया कि तुमकूर के पिछड़ेपन के लिये कांग्रेस जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य की पिछली कांग्रेस सरकारों की नीतियों के चलते किसानों को नुकसान झेलना पड़ा . मोदी ने कहा, ‘कर्नाटक के बेहतर भविष्य के लिये कांग्रेस को सबक सिखाना जरूरी है.’




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PM Narendra Modi Says, 'Those who think of taking out gold from potatoes are nowadays talking about farmers day in & day out

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तुमकुर (कर्नाटक) : कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राज्‍य के तुमकुर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए एक बार फिर से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने पिछले सात दशकों में किसानों की उपेक्षा की है. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस इंदिरा गांधी के समय से लेकर अब तक चुनाव जीतने के लिए गरीब लोगों को मूर्ख बनाती आ रही है. उन्‍हें न  तो किसानों की चिंता है और न ही गरीबों की. लोग अब कांग्रेस से थक गए हैं.


चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, 'अब कांग्रेस वालो ने ऊपर से लेकर नीचे तक, लोकल हो देशी हो या विदेशी हो. इधर से हो उधर से हो. समझ हो या न हो. चने का पेड़ होता है या पौधा होता है. हरी मिर्च होती है या लाल मिर्च होती है. जिन्‍हें इतनी भी समझ नहीं है, जो लोग आलू में से सोना निकालते हैं, उन्‍होंने आज दिन रात किसान किसान चिल्‍लाना शुरू किया है.'


कर्नाटक में गरजे पीएम मोदी, सैनिकों को गुंडा कहने का पाप कांग्रेस ने किया है


प्रधानमंत्री ने रैली में कहा, कांग्रेस की नीतियों के कारण आज किसानों की दुर्दशा है, हम उनके पाप धोने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस बस गरीब गरीब चिल्‍लाती रहती है. उन्‍होंने लोगों का जीवन ऊपर उठाने के लिए कुछ नहीं किया. अब उन्‍होंने गरीब कहना बंद कर दिया है, क्‍योंकिे लोगों ने अब एक गरीब प‍रिवार से प्रधानमंत्री को चुना है.



जेडीएस कांग्रेस गठबंधन पर हमला
प्रधानमंत्री ने इस रैली में जेडीएस और कांग्रेस पर भी हमला बोला. उन्‍होंने कहा, कहा, वह इन चुनावों में तो लड़ रहे हैं, लेकिन बेंगलोर में मेयर के लिए एक साथ हो जाते हैं. हालांकि इससे पहले जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगोड़ा पीएम मोदी की तारीफ कर चुके थे.


प्रधानमंत्री राज्‍य में कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, आज तक तुमकुर के लोगों को हेमवती नदी का पानी क्‍यों नहीं मिला. हमारी सरकार एरीगेशन प्रोजेक्‍ट पर काम कर रही है. इस प्रोजेक्‍ट पर प‍िछले 30 सालों से कोई काम नहीं हुआ है. कांग्रेस को कि‍सी की चि‍ंता नहीं है. वह सिर्फ अपने कालेधन को ठ‍िकाने लगाने में लगी है.




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Rahul Attack Attacks Narendra Modi On 5 Minute News And Updats

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नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राहुल गांधी नरेंद्र मोदी पर हमला करना नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने शनिवार को रेड्डी ब्रदर्स को टिकट देने पर सवाल उठाया। उन्होंने बाकायदा एक वीडियो जारी कर मोदी से करीब 3 सवाल पूछे। उन्होंने राज्य में बीजेपी के मुख्यमंत्री कैंडिडेट येदियुरप्पा को भी करप्शन के आरोपों पर घेरा। इससे पहले 1 मई को मोदी ने राहुल गांधी को बिना कागज देखे 15 मिनट भाषण देने और 5 बार विश्वेश्वरैया बोलने की चुनौती दी थी। इस नए हमले को राहुल का जवाब माना जा रहा है।

मोदीजी आप बोलते बहुत हैं, लेकिन करते नहीं है
- राहुल गांधी ने शनिवार को ट्वीट में लिखा- "प्रिय मोदीजी आप बोलते बहुत हैं, लेकिन समस्या ये है कि आपके काम आपके शब्दों से मेल नहीं खाते।"
- उन्होंने अपने ट्वीट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया और लिखा कि इसे आप 'कर्नाटक का मोस्टवांटेड' सीरियल की तरह देख सकते हैं।

- यह वीडियो 1 मिनट 20 सेकंड है।

3 सवाल पूछे,आरोप भी लगाए

- क्या आप रेड्डी ब्रदर्स गैंग को 8 टिकट देने पर 5 मिनट बोलेंगे?
- ऐसे शख्स (येदियुरप्पा) को मुख्यमंत्री बनाएंगे जिस पर 23 केस दर्ज है?
- क्या आप टिकट दिए गए उन 11 नेताओं पर बोलेंगे जिन पर करप्शन के आरोप हैं?
- वीडियो में इन सभी नेताओं के आरोप और केस के बारे में जानकारी दी गई है।

क्या था 15 मिनट बोलने देने का मामला

- राहुल गांधी ने अमेठी दौरे और दिल्ली में संविधान बचाओ रैली में कहा था- "हमें संसद में बोलने नहीं दिया जाता है, अगर मैं 15 मिनट संसद में भाषण दूं तो प्रधानमंत्री हमारे सामने खड़े नहीं हो पाएंगे।"

- मोदी ने 1 मई को चामराजनगर में रैली में जवाब दिया। उन्होंने कहा- "लोकतंत्र में हम नेता और नागरिकों की बातों को गंभीरता से लिया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने हाल ही में मुझे एक चुनौती। उन्होंने कहा कि अगर मैं संसद में 15 मिनट भी बोलूंगा तो मोदी जी बैठ नहीं पाएंगे। वे 15 मिनट बोलेंगे, ये भी एक बड़ी बात है और मैं बैठ नहीं पाऊंगा। कांग्रेस अध्यक्ष जी आप नामदार हैं और हम कामदार हैं। हम तो अच्छे कपड़े भी नहीं पहन सकते, आपके सामने कैसे बैठेंगे। हम लोगों ने नामदारों के जुल्म झेले हैं और आज इस ताकत को बढ़ाते चले जा रहे हैं।"

- ''मोदी जी को छोड़ो। मैं आपसे कहता हूं कि आप कर्नाटक के चुनाव प्रचार में 15 मिनट बगैर कागज हाथ में लिए हिंदी, अंग्रेजी या अपनी मां की मातृभाषा में बोल के दिखा दीजिए।"
- "एक बात और इस 15 मिनट के भाषण में 5 बार श्रीमान विश्वेश्वरैया का नाम ले लेना। कर्नाटक की जनता तय कर लेगी, उन्हें क्या करना है।''
- बता दें कि पिछले दिनों राहुल गांधी एक रैली में कर्नाटक की महान हस्ती मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का नाम ठीक से नहीं ले पाए थे। बाद में यह वीडियो काफी वायरल हुआ था।



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Narendra Modi Rallies Karnataka Assebly Election Bjp Congress News And Updates

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बेंगलुरु.नरेंद्र मोदी शनिवार को कर्नाटक के टुमकुर में कहा कि कांग्रेस कई सालों तक गरीब-गरीब चिल्लाती रही। लेकिन जब देश ने एक गरीब परिवार के व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन लिया तो उसने ये कहना बंद कर लिया। मोदी आज कर्नाटक में गड़ाग, शिमोगा और मैंगलुरु में भी सभाएं करेंगे। विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान होगा, 15 को नतीजे आएंगे।

वो तो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं

- मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा, "अब कांग्रेस वालों ने ऊपर से नीचे तक, लोकल हो, देशी हो या विदेशी हो, इधर से हो या उधर से हो, समझ हो या न हो, चना का पेड़ होता है या पौधा होता है, लाल मिर्च होती है या हरी, इसका भी जिनको ज्ञान नहीं है। जो आलू से सोना पैदा करने के बारे में सोचते हैं। वो अब दिन-रात किसान-किसान बोल रहे हैं।"
- "इंदिरा गांधी के समय से लेकर कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए गरीबों को मूर्ख बना रही है। कांग्रेस एक झूठ बोलने वाली पार्टी है। वे एक बार फिर चुनाव जीतने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। न तो उन्हें किसानों की चिंता है और न ही गरीबों की। लोग अब कांग्रेस से थक चुके हैं।"
- "कर्नाटक के लोगों को कांग्रेस और जेडीएस के अनकहे गठबंधन को समझना चाहिए। वे लड़ते दिख तो रहे हैं लेकिन बेंगलुरु में जेडीएस, कांग्रेस के एक मेयर को समर्थन कर रही है।"

टुमकुरु महान लोगों की भूमि
- मोदी ने कहा, "टुमकुरु महान लोगों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैं यहां आया था और सिद्धगंगा मठ के स्वामी शिवकुमार का आशीर्वाद लिया था।"

- "टुमकुरु के लोगों को हेमावती नदी का पानी क्यों नहीं मिल पा रहा? सिंचाई के क्षेत्र में बीते 30 साल से कोई काम नहीं हुआ। कांग्रेस की रुचि तो केवल कालाधन भरने में है। "



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Friday, 4 May 2018

Pm Modi Is Making Bjp Wave In By Rallies In Karnataka - कर्नाटक चुनाव: मोदी की रैलियों से बीजेपी की लहर बनाने की कोशिश

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कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।

फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।


बीजेपी की कोशिश कांग्रेस के अहिंदा (अल्पसंख्यक, हिंदूइदावरू यानी ओबीसी और दलित) के गढ़ में सेंध लगाने की है। उन्हें उम्मीद है कि उसके दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक का एक हिस्सा जद (स) को जाएगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं पिछड़ी कुरुबा जाति से हैं। प्रधानमंत्री मोदी उसके ओबीसी कार्ड का मजबूत काट हैं।

दक्षिण का मायाजाल

बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि दक्षिण कर्नाटक की फिलहाल जद (स) बनाम कांग्रेस लड़ाई को यदि वे त्रिकोणीय बना सकें तो चुनावी नतीजे अलग ही आएंगे। यहां 10 से 12 सीटें जीतने के लिए बीजेपी को मोदी का ही सहारा है।

लिंगायत कार्ड

पार्टी का मानना है कि कांग्रेस अंतिम अस्त्र के तौर पर बीजेपी की केंद्र सरकार पर लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने वाले राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी न देने का आरोप लगाएगी। लेकिन बीजेपी के भरोसा है कि इससे उन्हें अधिक नुकसान नहीं होगा।
 



कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुरुआत में केवल 12 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे जैसे प्रचार जोर पकड़ रहा है, मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले 12 से बढ़कर 15 हुई, उसके बाद 18 और अब यह तय हुआ है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री की कुल 21 रैलियां आयोजित कर बीजेपी की लहर बनाई जाए।


फिलहाल वे एक दिन छोड़कर कर्नाटक का दौरा कर रहे हैं। लेकिन मतदान के पास आने पर वे रोज कर्नाटक जाएंगे। चूंकि प्रधानमंत्री की हर रैली में दो लाख से तीन लाख लोग आ रहे हैं, पार्टी को विश्वास है कि इन रैलियों से उन्हें सुनिश्चित बढ़त प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री केवल रैलियां ही संबोधित नहीं कर रहे हैं। जिस दिन वे कर्नाटक नहीं जा पा रहे हैं उस दिन वे नमो ऐप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं। कभी युवाओं से, कभी महिलाओं से तो कभी व्यापारियों से। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो रहा है बल्कि प्रधानमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत से रोज रूबरू हो रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है कि बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव में इतना ज्यादा इस्तेमाल कर रही है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी के गली-मोहल्लों की पदयात्रा कर धूम मचा दी थी। विपक्ष जिसे मोदी की घबराहट का प्रतीक बता रहा था, उसी रणनीतिक कदम की वजह से बीजेपी को सहयोगियों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सीटें मिली थी।

इसी तरह उन्होंने त्रिपुरा, असम, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड आदि राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेकिन दक्षिण भारत का द्वार होने के नाते कर्नाटक का महत्व अलग है। यहां मिली बड़ी जीत अगले साल के लोकसभा चुनाव पर भी असर डालेगी। इसीलिए, यूपी के बाद मोदी सबसे ज्यादा प्रचार कर्नाटक में ही कर रहे हैं।






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ओबीसी बनाम ओबीसी







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Three More Meet Between Pm Modi And Jinping, America Applause - Pm मोदी और जिनपिंग के बीच हो सकती हैं तीन और मुलाकातें, अमेरिका ने की तारीफ

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 07:09 PM IST



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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस साल कम से कम तीन और मुलाकातें हो सकती हैं। भारत में चीनी राजदूत लुओ झाओहुई ने शुक्रवार को यह बात कही। हाल ही में दोनों नेताओं के बीच वुहान में अनौपचारिक वार्ता हुई थी। 

वुहान समिट : सिनो-इंडिया रिलेशंस एंड इट्स वे फारवर्ड पर आयोजित सेमिनार में लुओ ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच पिछले दिनों हुई दो दिवसीय समिट के दौरान वैश्विक और द्विपक्षीय दीर्घकालिक और रणनीतिक संबंधों को लेकर व्यापक सहमति बनी। वुहान में दोनों नेताओं की बातचीत से पुनर्विश्वास बहाली और संबंधों में सुधार को नई गति मिली जिसे दोकलाम में तनाव के चलते झटका लगा था। 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति शी का बीजिंग से बाहर दो बार मोदी का स्वागत किया जाना भारत के साथ संबंधों को दी जानी वाली अहमियत को दिखाता है। इससे पहले शी ने किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के लिए ऐसा नहीं किया। दोनों नेताओं के पास इस साल तीन से अधिक अवसरों पर मुलाकात के मौके होंगे।

चीनी राजदूत ने बताया कि दोनों नेता जून में चीन में होने वाले शंघाई कोऑपरेशन आर्गनाइजेशन (एससीओ), दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स सम्मेलन, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जी20 सम्मेलन में मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इन मुलाकातों को लेकर काम कर रहे हैं।  
 


चीन में पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर अमेरिका ने सराहना की है। व्हाइट हाउस ने भी मोदी-जिनपिंग के बीच चीन के वुहान शहर में हुई बैठक को समर्थन देते हुए कहा कि यह अच्छी बात है कि दुनिया के नेता आपस में मिल रहे हैं। 

चीन में इस दो दिनी अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी जिनपिंग सैन्य व सुरक्षा मामलों में संचार व्यवस्था को सुधारने पर सहमत हुए थे। शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते हैं ओर हम इसे इसी तरह आगे भी जारी रखना चाहते हैं। मेरा मानना है कि विश्व नेताओं के एक साथ आने से चीजें हमेशा ठीक हों। हम यदि सहयोग कर सकते हैं तो निश्चित तौर पर यह अच्छी बात होगी। 



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस साल कम से कम तीन और मुलाकातें हो सकती हैं। भारत में चीनी राजदूत लुओ झाओहुई ने शुक्रवार को यह बात कही। हाल ही में दोनों नेताओं के बीच वुहान में अनौपचारिक वार्ता हुई थी। 


वुहान समिट : सिनो-इंडिया रिलेशंस एंड इट्स वे फारवर्ड पर आयोजित सेमिनार में लुओ ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच पिछले दिनों हुई दो दिवसीय समिट के दौरान वैश्विक और द्विपक्षीय दीर्घकालिक और रणनीतिक संबंधों को लेकर व्यापक सहमति बनी। वुहान में दोनों नेताओं की बातचीत से पुनर्विश्वास बहाली और संबंधों में सुधार को नई गति मिली जिसे दोकलाम में तनाव के चलते झटका लगा था। 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति शी का बीजिंग से बाहर दो बार मोदी का स्वागत किया जाना भारत के साथ संबंधों को दी जानी वाली अहमियत को दिखाता है। इससे पहले शी ने किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के लिए ऐसा नहीं किया। दोनों नेताओं के पास इस साल तीन से अधिक अवसरों पर मुलाकात के मौके होंगे।

चीनी राजदूत ने बताया कि दोनों नेता जून में चीन में होने वाले शंघाई कोऑपरेशन आर्गनाइजेशन (एससीओ), दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स सम्मेलन, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जी20 सम्मेलन में मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इन मुलाकातों को लेकर काम कर रहे हैं।  
 






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व्हाइट हाउस ने की मोदी और शी बैठक की सराहना







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After Narendra Modi And Amit Shah Top Choice Of Karnataka Is Yogi Adityanath - मोदी और शाह के बाद कर्नाटक की टॉप च्वाइस योगी आदित्यनाथ

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद यदि भाजपा में प्रचार के लिए किसी की सबसे अधिक मांग है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के लगातार स्टार प्रचारक बने हुए हैं और राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रचार के लिए उनकी मांग बराबर बनी है। तटीय कर्नाटक में भी आदित्यनाथ की काफी मांग है। वह हुबली, उडुपी समेत दक्षिण कन्नड. तथा उत्तरी कन्नड़ में राजनीति का समीकरण बदल सकते हैं।

भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रचार में व्यस्त केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य में वह न केवल जनसभा को संबोधित करेंगे, बल्कि रोड शो समेत अन्य प्रचार में भी शामिल होंगे। माना यह जा रहा है कि योगी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 10 मई तक राज्य में पार्टी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए दर्जन भर से अधिक जन सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

कहां-कहां योगी ने किया प्रचार

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने गुजरात, हिमाचल और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार में हिस्सा लिया। गुजरात में योगी ने काफी दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ ही स्टार प्रचारक थे। त्रिपुरा में भाजपा को फहराने में उनकी काफी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी तरह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी के प्रचार के बाद भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नया आकार देने में सफल हो सकती है। इससे कांग्रेस की उम्मीदों को कुछ झटका लगने की भी उम्मीद है।

क्यों है योगी की मांग

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से हैं। भगवाधारी हैं और हिन्दुत्व के प्रतीक के रूप में उन्हें भाजपा में देखा जा रहा है। कर्नाटक में तटीय कर्नाटक का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। अल्पसंख्य भी बड़ी मात्रा में हैं। कर्नाटक का यही वह क्षेत्र है, जहां पिछले दो-तीन सालों में दो दर्जन के करीब भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और उन पर जानलेवा हमले हुए हैं। हुबली में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर ईज ऑफ डूइंग मर्डर का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि यहां से राजनीति का सांप्रदायिक रंग वोटों के ध्रुवीकरण में सहायक हो सकता है। ऐसा हुआ तो पूरे कर्नाटक में चुनाव का गणित अपना असर दिखा सकता है। वैसे भी इस इलाके में लिंगायतों का ठीक-ठाक प्रभाव भी है।  दक्षिणी कन्नड़ तो भाजपा के गढ़ के रूप में गिना जाता है। वैसे भी कर्नाटक हर मठ-मंदिरों का राज्य है। योगी आदित्यनाथ इसके लिए काफी उपयुक्त समझे जा रहे हैं।



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद यदि भाजपा में प्रचार के लिए किसी की सबसे अधिक मांग है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के लगातार स्टार प्रचारक बने हुए हैं और राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रचार के लिए उनकी मांग बराबर बनी है। तटीय कर्नाटक में भी आदित्यनाथ की काफी मांग है। वह हुबली, उडुपी समेत दक्षिण कन्नड. तथा उत्तरी कन्नड़ में राजनीति का समीकरण बदल सकते हैं।


भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रचार में व्यस्त केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य में वह न केवल जनसभा को संबोधित करेंगे, बल्कि रोड शो समेत अन्य प्रचार में भी शामिल होंगे। माना यह जा रहा है कि योगी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 10 मई तक राज्य में पार्टी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए दर्जन भर से अधिक जन सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

कहां-कहां योगी ने किया प्रचार

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने गुजरात, हिमाचल और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार में हिस्सा लिया। गुजरात में योगी ने काफी दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ ही स्टार प्रचारक थे। त्रिपुरा में भाजपा को फहराने में उनकी काफी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी तरह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी के प्रचार के बाद भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नया आकार देने में सफल हो सकती है। इससे कांग्रेस की उम्मीदों को कुछ झटका लगने की भी उम्मीद है।

क्यों है योगी की मांग

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से हैं। भगवाधारी हैं और हिन्दुत्व के प्रतीक के रूप में उन्हें भाजपा में देखा जा रहा है। कर्नाटक में तटीय कर्नाटक का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। अल्पसंख्य भी बड़ी मात्रा में हैं। कर्नाटक का यही वह क्षेत्र है, जहां पिछले दो-तीन सालों में दो दर्जन के करीब भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और उन पर जानलेवा हमले हुए हैं। हुबली में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर ईज ऑफ डूइंग मर्डर का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि यहां से राजनीति का सांप्रदायिक रंग वोटों के ध्रुवीकरण में सहायक हो सकता है। ऐसा हुआ तो पूरे कर्नाटक में चुनाव का गणित अपना असर दिखा सकता है। वैसे भी इस इलाके में लिंगायतों का ठीक-ठाक प्रभाव भी है।  दक्षिणी कन्नड़ तो भाजपा के गढ़ के रूप में गिना जाता है। वैसे भी कर्नाटक हर मठ-मंदिरों का राज्य है। योगी आदित्यनाथ इसके लिए काफी उपयुक्त समझे जा रहे हैं।





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Thursday, 3 May 2018

PM Modi bends down to help tribal woman Ratnibai wear slippers at Chhattisgarh rally

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Publish Date:Fri, 04 May 2018 10:48 AM (IST)



रायपुर [अनिल मिश्रा]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो चप्पल रत्नीबाई को पहनाई, वह अब रत्नीबाई के लिए सहेज कर रखने वाली धरोहर बन गई है। बुजुर्ग रत्नीबाई घर से खेत और खेत से जंगल तक नंगे पांव ही घूमती हैं, चप्पल को तो उन्होंने अपने झोपड़ेनुमा घर के इकलौते कमरे में धान के बोरे में सहेजकर रख दिया है।


इतना ही नहीं, कमरे का ताला बंद ...और चाबी रत्नीबाई के गले में। प्रधानमंत्री के हाथों मिली चप्पल को रत्नीबाई बेहद खास मौकों पर ही निकालती हैं, निहारती हैं, अपने तरीके से पोंछती हैं और इसके बाद उसे यूं पहनती हैं मानों पांव में चप्पल नहीं, किसी बादशाह ने सिर पर ताज धारण किया हो।



प्रधानमंत्री 14 अप्रैल को बीजापुर, छत्तीसगढ़ के जांगला कस्बे में पहुंचे थे। वहां एक जनसभा को संबोधित करने के साथ ही उन्हें कई योजनाओं का शुभारंभ भी करना था। ऐसी ही एक योजना के तहत तेंदूपत्ता संग्राहक रत्नीबाई को चरण पादुका देने के लिए मंच पर बुलाया गया।



जब रत्नीबाई मंच पर आईं तब प्रधानमंत्री अपनी जगह से उठे और अचानक झुककर अपने हाथों से रत्नीबाई के पावों में चप्पल पहना दी। यह बेहद खास और भावुक पल था। मोदी के ऐसा करते ही पूरा देश रत्नीबाई को पहचान गया।


अब रत्नीबाई अपने गांव ही नहीं, आसपास के पूरे इलाके में खास शख्सियत बन चुकी हैं। उनके लिए वह पल जीवन का सबसे खास पल बन चुका है। प्रधानमंत्री की भेंट की हुई चप्पल की देख-रेख में उन्होंने कोई कसर नहीं उठा रखी है।


घर में सबसे कीमती चीज चप्पल


ब्लॉक मुख्यालय भैरमगढ़ से सटे बंडपाल गांव में रत्नीबाई का भरा पूरा परिवार है, लेकिन संपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं। मिट्टी के घर के बाहर महुआ सुखाती रत्नीबाई ने गले में सूत की डोरी से बंधी कमरे की चाबी दिखाई। रत्नी के पुत्र बारीचंद समरथ ने बताया कि मां दिन भर नंगे पांव ही रहती हैं। किसी खास आयोजन में जाना हो तो ही चप्पल पहनती हैं। घर में चोरी होने लायक कुछ नहीं है लेकिन चप्पल जरूर बेशकीमती हो गई है। मां उसकी दिन रात रखवाली करती हैं।



- इसे मोदी ने दिया है, बाहर क्यों निकालूं भला। हर जगह पहनने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह बहुत खास चीज है, खास मौके के लिए ही है। - रत्नीबाई (स्थानीय गोंडी बोली में रखी अपनी बात)। 


By Sanjay Pokhriyal




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Wednesday, 2 May 2018

Rahul Gandhi Attacks Modi On Agriculture Policies Gives Him F Grade

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नई दिल्ली. राहुल गांधी ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी के उस आरोप का जवाब दिया जिसमें उन्होंने सिद्दारमैया सरकार पर किसानों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने की बात कही थी। राहुल ने कहा कि केंद्र ने राज्य के किसानों के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने इसके लिए बकायदा एक रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया, जिसमें मोदी सरकार को 'एफ' ग्रेड दिया। बता दें कि मोदी ने बुधवार को ऐप के जरिए पार्टी के किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं से बात की थी।

किसानों के मुद्दे समझने वाली सरकार की जरूरत
मोदी ने कहा, यह समय कर्नाटक में ऐसी सरकार बनाने का है जो किसानों के मुद्दों को समझती हो। हमारा वार्षिक बजट अब तक किसानों को लाभ पहुंचाने के उपायों को लेकर सराहा गया है। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि के महत्व को बताते हुए पीएम ने कहा कि केंद्रीय बजट 2018-19 में हमने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उत्पादन लागत के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1.5 गुना बढ़ोतरी की है।

कांग्रेस राज्य होने की वजह से कर्नाटक से भेदभाव

- इधर राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा- "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ। इसके जरिए निजी बीमा कंपनियां बड़ा मुनाफा कमा रही हैं और किसान परेशान हैं।"
- "कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने किसानों के 8500 करोड़ का कर्ज माफ किया। इसमें केंद्र का कोई योगदान नहीं था।"
- राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी कोई योगदान नहीं दिया। इस ट्वीट में खरीफ की 12 फसलों का जिक्र किया।

मोदी ने कहा था- येद्दियुरप्पा सुनिश्चित करेंगे किसानों की दोगुनी आय
- नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नमो ऐप के जरिए पार्टी के किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा- "किसान' नेता बीएस येद्दियुरप्पा सुनिश्चित करेंगे कि राज्य में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी हो सके। कर्नाटक में किसानों की तरक्की के लिए संवेदनशील सरकार की जरूरत है। किसान नेता येद्दियुरप्पा नये उत्साह के साथ किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हमारी कोशिशों के साथ मिलकर काम करेंगे।''
- प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए पर्याप्त काम न करने का सिद्दारामैया सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगहों पर जल स्रोतों को सुखा दिया गया और उन्हें मकान बनाने वालों को सौंप दिया गया।



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Narendra Modi Rallies In Karnataka Assembly Election

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बेंगलुरू.कर्नाटक में मोदी गुरुवार को कलबुर्गी, बेल्लारी और बेंगलुरु में 3 रैलियां करेंगे। इस दौरान मोदी 47 सीटों को कवर करेंगे। उधर, स्थानीय नेताओं की मांग पर प्रधानमंत्री की रैलियों की संख्या बढ़ा दी है। पहले शेडयूल में उन्हें 15 जगह जनसभाओं को संबोधित करना था। अब 6 और रैलियां करेंगे। यानी मोदी अब कुल 21 रैलियां करेंगे। हालांकि, अभी भाजपा ने यह नहीं बताया है कि ये रैलियां कहां और कब होंगी। इन नेताओं का कहना है कि मोदी की 1 मई को हुई 3 रैलियों से माहौल बदला है। बता दें कि राज्य में 224 सीटों पर 12 मई को वोटिंग होगी और 16 मई को नतीजे आएंगे।

21 सभाओं में 215 सीटों को कवर करेंगे
- कर्नाटक में मोदी की पहले 15 रैलियां प्रस्तावित थीं। अब 6 और रैलियों में बदलाव किया गया है। मोदी के चुनाव प्रचार का अगला चरण 5 मई को शुरू होगा। इसमें मोदी टुमकुर, शिवमोगा (शिमोगा) और गड़ाग में सभाएं करेंगे। यहां वे 49 सीटों को कवर करेंगे।

- मोदी 7 मई को रायचूर, चित्रदुर्ग, कोलार और 8 मई को विजयवाड़ा और मैंगलुरु में रैली करेंगे। इन दो दिनों में वे 65 सीटों को कवर करेंगे।

- मोदी ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत 1 मई को थी। मोदी ने पहली सभा में चामाराजनगर, मैसूर और मांड्या की 22 सीटों को कवर किया था। इस तरह मोदी 21 सभाओं के जरिए 215 सीटों को कवर करेंगे।

मोदी ने साधा था राहुल गांधी के 15 मिनट की चुनौती पर निशाना
- नरेंद्र मोदी ने पहले चरण के चुनावी अभियान में कांग्रेस सीएम सिद्धारमैया और राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था- राहुल सिद्धारमैया सरकार की उपलब्धियों पर किभी भी भाषा में बिना पढ़े 15 मिनट बोलकर दिखाएं।

- मोदी के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। जवाब में सिद्धारमैया ने कहा था- "येदियुरप्पा की पूर्व सरकार की उपलब्धियों पर प्रधानमंत्री कागज से पढ़कर ही 15 मिनट बोल दें।"

मोदी ने किसानों से भी किया संवाद
- मोदी ने बुधवार को पार्टी की किसान इकाई के कार्यकर्ताओं से भी ऐप के जरिए बात की। कर्नाटक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शिकायतों पर मोदी ने कर्नाटक सरकार को उदासीन बताया।



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Modi government betters pension plan for elderly people

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नई दिल्‍ली: केंद्र सरकार वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है. अब प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) के अंतर्गत वरिष्‍ठ नागरिक 15 लाख रुपए तक निवेश कर पाएंगे. इससे उन्‍हें हर माह 10000 रुपए पेंशन मिलने का रास्‍ता साफ हो गया है. यही नहीं इस योजना का सदस्‍य बनने की अंतिम तारीख भी 4 मई 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च 2020 कर दी गई है, यानि अब वरिष्‍ठ नागरिक इस बढ़ी हुई तारीख तक इसके सदस्‍य बन पाएंगे. पहले इस योजना में निवेश सीमा 7.5 लाख रुपए ही थी. यह फैसला केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया गया है. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसकी पुष्टि की है. उनक मुताबिक निवेश सीमा प्रति परिवार 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने से वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा का कवर बढ़ जाएगा.


एलआईसी दे रही है 8 प्रतिशत रिटर्न
केंद्र ने यह कदम सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्‍य से उठाया है. प्रधानमंत्री वय वंदन योजना (PMVVY) भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) चला रही है. इसका उद्देश्‍य 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को सामाजिक सुरक्षा देना है. सरकार के मुताबिक मार्च 2018 तक कुल 2.23 लाख वरिष्‍ठ नागरिकों ने इस योजना को ग्रहण किया है. इससे पहले वरिष्‍ठ पेंशन बीमा योजना-2014 प्रभावी थी, जिसमें 3.11 लाख वरिष्‍ठ नागरिक पंजीकृत थे.


क्या है पीएमवीवीवाई
इस योजना के तहत सदस्यों को 10 साल तक 8 प्रतिशत सुनिश्चित रिटर्न के रूप में पेंशन मिलती है. वरिष्ठ नागरिक मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक आधार पर पेंशन लेते है. यही नहीं रिटर्न 8% से कम आने पर सरकार उसकी भरपाई करती है.


कैसे ले प्रधानमंत्री वय वंदना योजना की सदस्‍यता 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पेंशन योजना की शुरुआत 2017 में की थी. इस उत्पाद को ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन भी सबस्‍क्राइब किया जा सकता है. इस योजना को माल एवं सेवा कर (GST) से छूट दी गई है. पेंशन लेने के 3 साल बाद नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिये खरीद मूल्य का 75% तक कर्ज लिया जा सकता है. पेंशनभोगी की पॉलिसी अवधि के दौरान मौत होने की स्थिति में खरीद मूल्य लाभार्थियों को सौंपा जाएगा. इस दौरान लागत का भुगतान सरकार से सब्सिडी के रूप में एलआईसी को करेगी.




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"Release Them": Relatives Of Gaza Hostages Break Into Israeli Parliament Panel

A group of relatives of Israelis held hostage by Palestinian gunmen in Gaza rushed into a parliamentary committee session in Jerusalem on Mo...