Friday, 4 May 2018

India doing extremely well on electrification: World Bank

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देश के गांवों में बिजली पहुंचाने का दावा करने वाली मोदी सरकार की तारीफ वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने की है. विश्व बैंक ने कहा कि भारत ने विद्युतीकरण के क्षेत्र में ‘बहुत अच्छा’ काम किया है और देश की 80 प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुंच गई है.




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In Last 50 Years Bank Deposit Account Openings Comes To A New Low - 50 सालों में पहली बार कम हुआ एफडी अकाउंट का खुलना, बैंकों से उठा विश्वास, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

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बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 May 2018 12:49 PM IST



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बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट (एफडी) अकाउंट खुलवाने से लोगों का मोहभंग हो गया है। मार्च 2018 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में एफडी खाते खोलने की संख्या पिछले 50 सालों के सबसे निचले स्तर पर चली गई है। आरबीआई द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 में इसमें केवल 6.7 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। 

इस वजह से घटा रूझान
आरबीआई के मुताबिक नोटबंदी के बाद बैंक में एफडी खाता खुलवाने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया था। लेकिन पिछले वित्त वर्ष में हुए बैंकिंग घोटालों के बाद से लोगों का बैंकों से विश्वास उठने लगा और उन्होंने एफडी से पैसे को म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश कर दिया। 

एसबीआई के रिटेल व डिजिटल बैंकिंग के एमडी पीके गुप्ता ने कहा कि नोटबंदी के बाद लोगों ने पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट जमा कराने के लिए बैंकों में एफडी खाते खुलवाए थे।

लेकिन इस वित्त वर्ष में अधिकांश पैसा बैंकिंग सिस्टम से बाहर जा चुका है। पीएनबी व अन्य बैंकों में घोटाले खुलने के बाद से लोग काफी डर गए थे। इसके बाद सरकार द्वारा FRDI बिल लाने की खबरों से भी काफी लोगों को लगा कि बैंक में पैसे जमा करना खतरे से खाली नहीं है। 


2017-18 में बैंकों में केवल 114 लाख करोड़ रुपये जमा हुआ। लेकिन इसी दौरान म्यूचुअल फंड में 21.36 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए। इसके अलावा लोगों ने इन्श्योरेंस कंपनियों से भी करीब 193 लाख करोड़ रुपये की पॉलिसी को खरीदा गया। 

बैंक बढ़ा सकते हैं ब्याज दर
एफडी कम होने से बैंक अब अपनी ब्याज दरों में भी इजाफा कर सकते हैं, जिसके बाद बैंकों से लोन लेना और महंगा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक अपने यहां जमा रुपयों के आधार पर ही ब्याज दरों को तय करते हैं। हाल ही में कई प्रमुख बैंकों ने अपनी एफडी और लोन पर लगने वाली ब्याज दर को काफी बढ़ा दिया था। 



बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट (एफडी) अकाउंट खुलवाने से लोगों का मोहभंग हो गया है। मार्च 2018 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में एफडी खाते खोलने की संख्या पिछले 50 सालों के सबसे निचले स्तर पर चली गई है। आरबीआई द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 में इसमें केवल 6.7 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। 


इस वजह से घटा रूझान
आरबीआई के मुताबिक नोटबंदी के बाद बैंक में एफडी खाता खुलवाने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया था। लेकिन पिछले वित्त वर्ष में हुए बैंकिंग घोटालों के बाद से लोगों का बैंकों से विश्वास उठने लगा और उन्होंने एफडी से पैसे को म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश कर दिया। 

एसबीआई के रिटेल व डिजिटल बैंकिंग के एमडी पीके गुप्ता ने कहा कि नोटबंदी के बाद लोगों ने पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट जमा कराने के लिए बैंकों में एफडी खाते खुलवाए थे।

लेकिन इस वित्त वर्ष में अधिकांश पैसा बैंकिंग सिस्टम से बाहर जा चुका है। पीएनबी व अन्य बैंकों में घोटाले खुलने के बाद से लोग काफी डर गए थे। इसके बाद सरकार द्वारा FRDI बिल लाने की खबरों से भी काफी लोगों को लगा कि बैंक में पैसे जमा करना खतरे से खाली नहीं है। 






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जमा हुआ केवल 114 लाख करोड़ रुपये







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Bjp Facing Self Goal By Own Leaders On Dalit Issue - दलितों को साधने की बीजेपी की रणनीति पर उसी के मंत्री- सांसद लगा रहे पलीता

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दलितों पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से दलित कार्ड राजनीति का प्रमुख एजेंडा रहा है और बात जब चुनाव में मतदाताओं को लुभाने की हो तो यह कार्ड आन-बान की बात हो जाती है। दलित विरोधी छवि से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी दलितों को प्रभावित करने का हर दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेकिन कोई भी दलित कार्ड काम नहीं आ रहा है। चाहें दलितों के घर जाकर खाना खाने का हो या फिर उनके घर सोने का या बात करें उनके साथ उनकी परेशानियों को जानने का,भाजपा मंत्रियों का सारा दांव उल्टा ही पड़ता जा रहा है।

भाजपा के मंत्री, विधायक और सांसद अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

मामला उत्तर प्रदेश का है जहां योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को और बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घर जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है। योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी दलितों के यहां खाने को लेकर एक हास्यास्पद बयान दे डाला है उन्होंने कहा- मच्छर काटने के बावजूद मंत्री दलितों के घर रुक रहे हैं। 
दलितों पर हो रही राजनीति से आहत बीजेपी के दलित सांसद उदित राज ने मंत्रियों की इन हरकतों को शर्मनाक और  ऐसी घटनाओं को दलित समुदाय के लिए अपनामजनक बताया है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के दलितों का मानना है कि यह उन्हें नीचा दिखाता है। उदित राज ने कहा कि मैं बीजेपी के प्रवक्ता के रूप में नहीं बोल रहा हूं बल्कि एक दलित के रूप में बोल रहा हूं। मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं कि एक सवर्ण दलित के घर यह बोलने जाता है कि देखो वे नीच हैं और दूसरे ऊंचे हैं। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी भाजपा के मंत्रियों को दलितों के घर में खाना खाने का दिखावा करने से बचने की सलाह दी है। संघ के प्रचार प्रमुख डॉ मनमोहन वैद्य ने कहा, "पीएम मोदी ने नेक नीयती से दलितों के कल्याण की मुहिम चलाई थी लेकिन पार्टी नेताओं ने उनकी विचार धारा को ही नष्ट कर दिया है।" 

उन्होंने कहा कि 'संघ सदियों से नवरात्रि के समय दलित बालिकाओं को अपने घर पूजते आ रहे हैं लेकिन कभी दिखावा नहीं किया।' संघ से पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी 'दलितों के लिए आयोजित भोज में शामिल होने से यह कह कर मना कर दिया कि वह भगवान राम नहीं हैं, जो दलितों के साथ भोजन कर उन्हें पवित्र कर देंगी।' 

वहीं, बहराइच की भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने नेताओं के दलितों के घर भोजन करने को लेकर सवाल उठाए और उन (नेताओं) के इस कृत्य को दलितों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि ये जो परंपरा चल रही है, उसमें दलित वर्ग का सिर्फ अपमान हो रहा है। नेता दलित के घर खाना खाने जाते हैं लेकिन खाना बनाने वाला कोई और होता है, परोसने वाला कोई और...। बर्तन टेंट हाउस के होते हैं। 


दलितों पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से दलित कार्ड राजनीति का प्रमुख एजेंडा रहा है और बात जब चुनाव में मतदाताओं को लुभाने की हो तो यह कार्ड आन-बान की बात हो जाती है। दलित विरोधी छवि से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी दलितों को प्रभावित करने का हर दांव उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 


पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेकिन कोई भी दलित कार्ड काम नहीं आ रहा है। चाहें दलितों के घर जाकर खाना खाने का हो या फिर उनके घर सोने का या बात करें उनके साथ उनकी परेशानियों को जानने का,भाजपा मंत्रियों का सारा दांव उल्टा ही पड़ता जा रहा है।

भाजपा के मंत्री, विधायक और सांसद अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

मामला उत्तर प्रदेश का है जहां योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को और बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घर जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है। योगी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी दलितों के यहां खाने को लेकर एक हास्यास्पद बयान दे डाला है उन्होंने कहा- मच्छर काटने के बावजूद मंत्री दलितों के घर रुक रहे हैं। 





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दलितों के घर में खाना खाने का दिखावा करने से बचने की सलाह दी है







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छत्तीसगढ़: बीजापुर में सीआरपीएफ के जवानों ने बरामद किए दो प्रेशर बम

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नक्‍सली धमकियों के बीच छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सीआरपीएफ जवानों ने दो प्रेशर बम बरामद किए हैं. शुक्रवार को नक्सलियों ने बस्तर में बंद का अह्वान किया है.




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Saddam Padar, Riyaz And Other 36 Militant Active In Pulwama South Kashmir - J&k: पुलवामा में मौजूद इन 36 आतंकियों की कुंडली बनकर तैयार, इसी गर्मी में होगा सफाया

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अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 04 May 2018 12:25 PM IST



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आतंकी समीर टाइगर के बाद पुलवामा जिले के तीन दर्जन और आतंकियों के खात्मे की तैयारी कर ली गई है। इनमें सबसे ऊपर नाम रियाज नैकू और सद्दाम पाडर का है। यह आतंकी सुरक्षाबलों पर बड़े हमले करने की तैयारी कर रहे हैं, जिनके खिलाफ सुरक्षाबलों ने रणनीति तैयार कर ली है। 

कश्मीर संभाग में पुलवामा ही एक मात्र ऐसा जिला है, जिसमें सबसे अधिक आतंकी सक्रिय हैं। इस जिले में इस समय 36 आतंकी सक्रिय हैं। पुलवामा के इन 36 आतंकियों की कुंडली तैयार कर ली गई है। इन आतंकियों में 31 स्थानीय और 5 विदेशी आतंकी हैं। 25 हिजबुल, 5 लश्कर और 5 जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हैं।

हिजबुल के आतंकियों में सद्दाम पाडर और रियाज नैकू का नाम सबसे ऊपर है। आतंकी गर्मी में सुरक्षाबलों पर बड़े हमले कर सकते हैं। सुरक्षाबलों ने पुलवामा जिले में अपना सुरक्षा ढांचा मजबूत कर लिया है। कई ऐसे इलाके हैं, यहां पर आर्मी अपना बेस बना रही है, ताकि इन आतंकियों पर सटीक नजर रखी जा सके।

इन आतंकियों को घेरकर मारने के लिए हर तरह की रणनीति बनाई जा रही है। पुलवामा जिला ही इस समय सबसे अधिक आतंकवाद ग्रस्त है। यहां आतंकियों को स्थानीय मदद भी काफी मिलती है। इसलिए एजेंसियों ने इस पर फोकस कर दिया है।


आबिद मंजूर (हिजबुल)
जाहूर ठोकर (हिजबुल)
फिरदौस मलिक (हिजबुल)
रियाज डार और शौकत टाक (लश्कर)
रियाज नैकू (हिजबुल)
सद्दाम पाडर (हिजबुल)
इरफान शेख (हिजबुल)

कश्मीर में 250 से अधिक आतंकी स्थानीय
कश्मीर संभाग में इस समय 300 के करीब आतंकी सक्रिय हैं। इनमें 250 के करीब सिर्फ हिजबुल मुजाहिदीन के ही हैं। जो सभी कश्मीर के रहने वाले हैं। बाकी के लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के हैं। कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के 15 से 20 आतंकी हैं।

जबकि 30 से 40 आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के हैं। पिछले कुछ समय से यह संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। जैश के नेटवर्क को भी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।



आतंकी समीर टाइगर के बाद पुलवामा जिले के तीन दर्जन और आतंकियों के खात्मे की तैयारी कर ली गई है। इनमें सबसे ऊपर नाम रियाज नैकू और सद्दाम पाडर का है। यह आतंकी सुरक्षाबलों पर बड़े हमले करने की तैयारी कर रहे हैं, जिनके खिलाफ सुरक्षाबलों ने रणनीति तैयार कर ली है। 


कश्मीर संभाग में पुलवामा ही एक मात्र ऐसा जिला है, जिसमें सबसे अधिक आतंकी सक्रिय हैं। इस जिले में इस समय 36 आतंकी सक्रिय हैं। पुलवामा के इन 36 आतंकियों की कुंडली तैयार कर ली गई है। इन आतंकियों में 31 स्थानीय और 5 विदेशी आतंकी हैं। 25 हिजबुल, 5 लश्कर और 5 जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हैं।

हिजबुल के आतंकियों में सद्दाम पाडर और रियाज नैकू का नाम सबसे ऊपर है। आतंकी गर्मी में सुरक्षाबलों पर बड़े हमले कर सकते हैं। सुरक्षाबलों ने पुलवामा जिले में अपना सुरक्षा ढांचा मजबूत कर लिया है। कई ऐसे इलाके हैं, यहां पर आर्मी अपना बेस बना रही है, ताकि इन आतंकियों पर सटीक नजर रखी जा सके।

इन आतंकियों को घेरकर मारने के लिए हर तरह की रणनीति बनाई जा रही है। पुलवामा जिला ही इस समय सबसे अधिक आतंकवाद ग्रस्त है। यहां आतंकियों को स्थानीय मदद भी काफी मिलती है। इसलिए एजेंसियों ने इस पर फोकस कर दिया है।






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पुलवामा के प्रमुख आतंकी







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